Iran Attack on Kuwait News: अमेरिका-ईरान के ताजा हमलों में अमेरिका जितना ईरान को टार्गेट कर रहा है, उतना ही ईरान उसके सहयोगी देशों पर अंगारे बरसा रहा है. जॉर्डन और कुवैत को तो उसके ऐसे निशाने पर ले रखा
है, मानो उसे पूरी तरह बर्बाद करके ही मानेगा. ऐसा नहीं है कि अमेरिकी सेनाओं ने सब्र बना रखा है, उसकी ओर से भी अटैक किए जा रहे हैं लेकिन ईरान ऐसे देशों को घसीट रहा है, जो सीधे तौर पर इस युद्ध से नहीं जुड़े हैं. इसी सिलसिले में कुवैत का अल सुबिया पावर जनरेशन एंड वॉटर डिसैलिनेशनल प्लांट को निशाना बनाया, जिसके बाद इलाके में भयानक आग लग गई.
इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह से अल सुबिया में हमले के बाद आग लग गई. कुवैत की सेनाओं ने बताया कि उन्होंने कई ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करके हवा में ही तबाह भी कर दिया, लेकिन ईरान का ये हमला सटीक रहा, जिसे देखकर ही इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
क्या नागरिक सुविधाओं को निशाना बना रहा ईरान?
कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल सऊद अब्दुलाजिज अल ओताइबी ने कहा कि कुवैती एयरस्पेस में आने वाली ईरानी मिसाइलों को एयर डिफेंस लगातार डिटेक्ट करके खत्म कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान का गुस्सा नागरिक सुविधाओं पर टूट रहा है. खासतौर पर ऊर्जा और जल संयंत्रों को निशाना बनाकर बड़ा नुकसान करने की कोशश की जा रही है.
अमेरिका ने दिया मुंहतोड़ जवाब
इसके तुरंत बाद अमेरिका की सेंट्रल कमांड की ओर से ईरान पर ताजे हमलों को ऐलान कर दिया गया. सोशल मीडिया के जरिये जानकारी दी गई कि स्थानीय समय के मुताबिक शाम 7 बजे के बाद से हमलों की नई लहर शुरू की गई है, जो अटैक का नौवां राउंड है. अमेरिका के मुताबिक इसका मकसद ईरान की उस क्षमता को कम करना है, जिसके चलते वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कॉमर्शियल शिप्स को निशाना बना रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि नए हमले युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की याद में उन्हें सम्मान देने के लिए किए जा रहे हैं.
क्यों कुवैत की कमर तोड़ने वाला है हमला?
दरअसल कुवैत वो देश है, जो पानी की सप्लाई के लिए डिसैलिनेशन प्लांट पर निर्भर करता है. उसके लिए ये बड़ा झटका है, जबकि कुवैत सीधे-सीधे खाड़ी की इस लड़ाई में शामिल भी नहीं है. वो ईरान की उस लिस्ट में शामिल हो गया है, जो उसने अमेरिका के दोस्तों के तौर पर बनाई है और उसकी नागरिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचा रहा है. कुवैत की अर्थव्यवस्था का ज्यादातर हिस्सा तेल से आता है, जिसे पहले ही होर्मुज में चल रहे हालात की वजह से मुश्किल का सामना उठाना पड़ रहा है. अब उसकी मूलभूत सुविधा यानि पानी पर भी ईरान का ये अटैक उसे परेशान कर रहा है और हौसला तोड़ने वाला है.














