भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर साइन कब होंगे, इसके बारे में लेटेस्ट अपडेट आई है. मामले से जुड़े अमेरिका के एक सीनियर अधिकारी ने बुधवार को रॉयटर्स से कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर अगले तीन से चार महीनों
में हस्ताक्षर हो सकते हैं. उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है.
मनीला में आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारी ने कहा, समझौता… तैयार है. हमारे पास असल में कागजात मौजूद हैं. अधिकारी ने कहा कि कुछ काम अभी बाकी है. अमेरिका अपनी ‘सेक्शन 301’ ट्रेड इंक्वायरी को पूरा कर रही है. अधिकारी ने कहा कि समझौता लगभग पूरा हो चुका है, और बाकी देरी अनसुलझे द्विपक्षीय मुद्दों के बजाय अमेरिका की चल रही व्यापार जांच के कारण हो रही है. अधिकारी ने कहा कि 60 देशों से जुड़ी एक ‘सेक्शन 301’ जांच के इस सप्ताह या अगले सप्ताह पूरी होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि एक बार वह और अन्य चल रही जांच पूरी हो जाने के बाद, हम न केवल भारत में बल्कि अन्य जगहों पर भी प्रगति देखेंगे.
क्या है ‘सेक्शन 301’
अमेरिका का ‘सेक्शन 301’ ट्रेड एक्ट 1974 का एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है. यह अमेरिकी ट्रेड रिप्रजेंटेटिव को अन्य देशों की व्यापारिक प्रथाओं की जांच करने का विशेष अधिकार देता है. अगर अमेरिका को लगता है कि कोई देश अनुचित, भेदभावपूर्ण या ऐसे नियम अपना रहा है जिससे अमेरिकी कंपनियों और व्यापार को नुकसान पहुंच रहा है, तो इस सेक्शन के तहत उसकी जांच की जाती है. जांच में आरोप सही पाए जाने पर, अमेरिका को उस देश के खिलाफ एक्शन लेने का अधिकार मिल जाता है. इसके तहत अमेरिका उस देश के उत्पादों पर भारी टैरिफ लगा सकता है या व्यापारिक प्रतिबंध लागू कर सकता है, ताकि अपने घरेलू उद्योगों और आर्थिक हितों की रक्षा की जा सके.
टैरिफ की धमकी भी
जब पूछा गया कि समझौता कब तक पूरा हो सकता है, तो अधिकारी ने जवाब दिया- शायद और तीन-चार महीने लगेंगे.अमेरिका पहले ही दर्जनों देशों पर 12.5% तक के नए टैरिफ का प्रस्ताव दिया है, क्योंकि उन पर जबरन श्रम से बनी वस्तुओं के व्यापार को रोकने में विफल रहने का आरोप है. इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका में आयात की जाने वाली जेनेरिक दवाएं 1 अगस्त से दो साल तक टैरिफ-मुक्त रहेंगी, जिसके बाद एक साल के लिए 100% और उसके बाद 200% टैरिफ लगेगा. इस कदम से भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग पर असर पड़ सकता है. जेनेरिक दवाओं के निर्यातकों में भारत सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है, क्योंकि 2025 में इसके 25.8 बिलियन डॉलर के फार्मास्युटिकल निर्यात में अमेरिका का हिस्सा 9.7 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 38% था.














