US-Iran Intense Attacks: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब खुली जंग में बदल चुका है. पहले खुलकर इस बारे में बात नहीं हो रही ती लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद सारा फोकस बातचीत से हटाकर
बदला लेने पर शिफ्ट कर दिया है. एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के अधिकारी कह रहे हैं कि फिलहाल डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक समाधान के बारे में नहीं सोच रहे हैं और उनका पूरा ध्यान ईरान को सबक सिखाने पर है क्योंकि अमेरिका के दो सैनिकों को उसने जॉर्डन एयरबेस अटैक में मार डाला है. अमेरिकी सेना लगातार दसवें दिन भी ईरान पर जमकर बारूद बरसा रही है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस वक्त इतने गु्स्से में हैं कि उन्होंने कसम खाई है कि वो ईरान से अमेरिका के इस नुकसान का बदला लेकर ही मानेंगे. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चेतावनी दी है –
इस बार ईरान जितनी बार अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाएगा, उसे इससे कई गुना ज्यादा भुगतना पड़ेगा.
ईरान पर कहर बनकर टूट रहा अमेरिका
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि अमेरिका ने ईरान पर और हमले किए हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि तेहरान पिछले कुछ दिनों में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत की कीमत चुकाएगा. ईरानी मीडिया ने कई जगहों पर विस्फोटों की खबर दी। पेंटागन ने जॉर्डन के मुवाफक सालती एयर बेस पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की. 25 साल के फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहन और 19 साल की प्राइवेट इसाबेला गोंजालेज की मौत हो गई. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हमले की जिम्मेदारी ली थी. यह मार्च के बाद ईरानी हमलों में पहली अमेरिकी मौत है, ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा भड़का हुआ है.
क्या छिपा रहा है पेंटागन?
- पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने एक्स पर लिखा कि 7 जुलाई 2026 से अब तक लगभग 100 अमेरिकी सैनिकों को कुछ न कुछ चोट आई है. इनमें 96% वापस ड्यूटी पर लौट चुके हैं. ज्यादातर मामलों में मामूली सिर की चोट थी. 4 सैनिकों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अब वे छुट्टी पर हैं.
- सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन ने चोटों की सूचना देने में देरी की. न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया कि पेंटागन ने दर्जनों चोटों को छिपाया. पेंटागन पिछले ढाई महीने से कोई प्रेस ब्रीफिंग नहीं कर रहा. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सैन्य रणनीति या हालिया मौतों पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया. ऐसे में उन पर सवाल उठ रहे हैं.
- अमेरिका मिडिल ईस्ट में लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ा रहा है.इजरायल में दर्जनों ईंधन भरने वाले विमान पहुंच चुके हैं. ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमले तेज कर रहा है, लेकिन घरेलू स्तर पर हताहतों की खबरों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है.
- पहले मीडिया को सैनिकों, परिवारों और देश को सूचित करने का मौका मिलता था, लेकिन अब हेगसेथ मीडिया से लड़ रहे हैं. उन्होंने पेंटागन कॉम्प्लेक्स से प्रेस को बाहर किया और सूचनाएं छिपाई जा रही हैं. सीएनएन के सवाल पर पार्नेल ने कहा कि सरकार रीयल-टाइम अपडेट दे रही है, लेकिन आलोचक इसे पर्याप्त नहीं मानते.
प्रलय ढाने वाला है अमेरिका?
ईरान पर हमले बढ़ाने के साथ अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी ताकत मजबूत कर रहा है. उसके 30 से ज्यादा टैंकर इजरायल में खड़े हुए हैं और लड़ाकू विमानों की तैनाती भी बढ़ाई गई है. ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि तेहरान को सैनिकों की मौत की कीमत चुकानी पड़ेगी. ईरान के हमलों में अब तक 100 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं. ये नुकसान अमेरिका पचा नहीं पाएगा क्योंकि यहां जैसे ही सैनिकों के ताबूत आते हैं सरकारें हिल जाती हैं. ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप को तीखे तेवर दिखाने की पड़ेंगे और उनके सब्र का इम्तिहान ले रहे ईरान के लिए संकट बढ़ सकता है.
ईरान की ओर से भी लगातार उन्हें उकसाया जा रहा है, खामेनेई के महाशैतान वाले बयान हों या फिर अरागची की युद्ध में लीड लेने की बात. हर तरफ से डोनाल्ड ट्रंप प्रेशर बढ़ रहा है, तो उनके आगे के कदम खतरनाक हो सकते हैं. ऐसे में ट्रंप प्रशासन हमले तेज कर रहा है और जनता को ये साबित करने की कोशिश में जुटा है कि सैनिकों की जिंदगी उसके लिए कितनी मायने रखती है. इसी बीच अंतरिम चुनावों की तारीख भी नजदीक आ रही है और ये ट्रंप की वॉर पॉलिसी की अग्निपरीक्षा होगी.














