ईरान और यूएस के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. इस टेंशन के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही पर असर हो रहा है. ऐसे में कई लोगों के मन में एक बड़ा सवाल ये है कि आखिर एलपीजी सिलेंडर सप्लाई पर असर हो सकता
है और क्या भारत में LPG सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कमी फिर से हो जाएगी? फिलहाल इसका जवाब नहीं है. अभी देश में गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य बनी हुई है और लोगों के घरों तक समय पर सिलेंडर पहुंच रहे हैं.
दरअसल, भारत ने पिछले कुछ सालों में तेल और गैस खरीदने के लिए सिर्फ एक देश या एक समुद्री रूट पर निर्भर रहने की बजाय कई ऑप्शन तैयार किए हैं. यही वजह है कि होर्मुज में तनाव बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में LPG की सप्लाई पर फिलहाल कोई बड़ा असर नहीं दिख रहा है. सरकार और तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरे सोर्स और ऑप्शनल रास्तों का इस्तेमाल कर सकती हैं.
होर्मुज इतना अहम क्यों माना जाता है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक समुद्री रूट है. दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और नेचुरल गैस की सप्लाई के लिए इसी रूट पर निर्भर करता है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के करीब 25% कच्चे तेल और 20% LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई इसी रूट्स से होती है. अगर किसी वजह से यह रास्ता लंबे समय के लिए बंद हो जाए, तो दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. इसका असर पेट्रोल, डीजल, LPG और अन्य फ्यूल की कीमतों पर भी पड़ सकता है. हालांकि, फिलहाल जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है. कुछ सुरक्षा चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन सप्लाई चेन अभी सामान्य रूप से चल रही है.
भारत में गैस सिलेंडर कैसे पहुंच रहे हैं?
भारत अपनी जरूरत का तेल और गैस सिर्फ खाड़ी देशों से ही नहीं खरीदता. पिछले कुछ सालों में देश ने रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है. इसके अलावा सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के पास ऐसे पाइपलाइन और पोर्ट्स भी हैं, जिनकी मदद से कुछ सप्लाई होर्मुज पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहती. भारत के पास LPG और कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक भी मौजूद रहता है. सरकारी तेल कंपनियां जरूरत पड़ने पर दूसरे पोर्ट्स के जरिए भी सप्लाई बनाए रख सकती हैं. यही वजह है कि फिलहाल घरेलू बाजार में गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है और न ही लोगों को अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है.
क्या तनाव का असर भारत पर होगा असर?
अगर होर्मुज में तनाव लंबे समय तक बना रहता है या ये रूट पूरी तरह प्रभावित होता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में तेल और गैस महंगे हो सकते हैं. ऐसे में इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है. हालांकि, सरकार ने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए स्ट्रैटजिस्ट पेट्रोलियम स्टोरेज तैयार किए हैं और एनर्जी के दूसरे सोर्स पर भी लगातार काम किया जा रहा है. फिलहाल आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. LPG सिलेंडर की सप्लाई सामान्य है और बाजार में किसी तरह की किल्लत नहीं है. आने वाले समय में हालात कैसे बदलते हैं, इस पर भी नजर रहने वाली है, लेकिन अभी फिलहाल तेल और गैस की कमी नहीं होगी.














