Gandhi on Currency: भारत इस वक्त पॉलीमर नोट लाने की तैयारी कर रहा है. भारतीय मुद्रा पर महात्मा गांधी की फोटो छपी है. लेकिन इस तस्वीर के पीछे की कहानी काफी
कम लोग जानते हैं. आपको बता दें कि यह तस्वीर ना तो कोई पेंटिंग है और ना ही डिजिटल रूप से बनाया गया कोई चित्र. दरअसल यह 1946 में ली गई एक असली ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर का एक छोटा सा हिस्सा है.
कहां ली गई थी यह तस्वीर?
यह तस्वीर 1946 में कोलकाता के वायसराय हाउस में ली गई थी. इसे वर्तमान में राजभवन के नाम से जाना जाता है. उस समय महात्मा गांधी ब्रिटिश राजनेता लॉर्ड फ्रेडरिक विलियम पेथिक-लॉरेंस से मिलने पहुंचे थे. मूल तस्वीर में गांधी जी अकेले नहीं खड़े थे. वे पेथिक-लॉरेंस के साथ मुस्कुरा रहे थे और बाद में भारतीय बैंक नोट पर इस्तेमाल के लिए मूल छवि से सिर्फ गांधी जी का चित्र ले लिया गया था. दिलचस्प बात यह है कि आरबीआई के मुताबिक इस तस्वीर को खींचने वाले फोटोग्राफर की पहचान उसके रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है.
इस खास फोटो को ही क्यों चुना गया?
आरबीआई ने इस तस्वीर को इस वजह से चुना क्योंकि इसमें गांधी जी की शांत, स्वाभाविक मुस्कान झलकती है. यह शांति, सादगी और करुणा को दर्शाता है. दूसरा अहम कारण तकनीकी था. इस छवि में गांधी जी का चेहरा साफ और प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है. इससे नोट की गुणवत्ता से समझौता किए बिना वॉटरमार्क और जालसाजी विरोधी तत्वों जैसी सुरक्षा सुविधाओं को शामिल करना आसान हो जाता है.
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किसी दूसरे नेता की जगह गांधी जी की तस्वीर का क्यों इस्तेमाल किया गया?
आरबीआई के मुताबिक महात्मा गांधी भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों का इस तरह से प्रतिनिधित्व करते हैं कि उन्हें व्यापक राष्ट्रीय स्वीकृति मिली है. भारत की विविधता को देखते हुए किसी दूसरे ऐतिहासिक व्यक्ति को चुनने से क्षेत्रीय या फिर राजनीतिक असहमति हो सकती थी.
भारतीय मुद्रा पर गांधी जी के चित्र का विकास
जिस तरह आज के बैंक नोट में गांधी जी की तस्वीर देखने को मिलती है वह हमेशा ऐसे नहीं थी. उनका चित्र पहली बार 1969 में उनकी जन्मशती के अवसर पर जारी किए गए ₹100 के स्मारक नोट पर दिखाई दिया था. उस नोट के पिछले हिस्से पर सेवाग्राम आश्रम भी था. 1987 में गांधी जी का चेहरा पहली बार ₹500 के बैंक नोट पर इस्तेमाल किया गया था. 1996 में एक बड़ा बदलाव तब आया जब आरबीआई ने महात्मा गांधी श्रृंखला के बैंक नोट पेश किए. उस समय से गांधी जी का मुस्कुराता हुआ चेहरा सभी भारतीय मुद्रा मूल्य वर्गों में एक स्थायी विशेषता बन गया.
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