पूर्व सुरक्षा
तैराकों के लिए पूर्व-सुरक्षा का मतलब है कि वे पानी में जाने से पहले अपनी त्वचा को तैयार करते हैं। यह तैयारी उनकी त्वचा को कठोर पानी और सूर्य की हानिकारक
किरणों से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है। तैराक आम तौर पर अपनी त्वचा पर एक सुरक्षात्मक परत लगाते हैं। यह सुरक्षात्मक परत पानी के प्रवेश को कम करती है, जिससे त्वचा में नमी बनी रहती है। यह सूर्य की किरणों को भी अवरुद्ध करता है, जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। तैराकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सामान्य उत्पाद हैं, पानी-प्रतिरोधी सनस्क्रीन, जो व्यापक स्पेक्ट्रम सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि त्वचा को UVA और UVB दोनों किरणों से बचाया जाए। त्वचा को पूरी तरह से ढकना महत्वपूर्ण है, विशेषकर उन क्षेत्रों पर जो सूर्य के संपर्क में आते हैं, जैसे कि चेहरा, गर्दन, हाथ और पैर। तैराक अक्सर सनस्क्रीन को बार-बार लगाते हैं, खासकर तैरने के बाद, क्योंकि पानी सनस्क्रीन को धो सकता है।
तुरंत मॉइस्चराइजेशन
तैराकी के बाद त्वचा को तुरंत मॉइस्चराइज करना तैराकों की दिनचर्या का एक अभिन्न अंग है। तैराकी त्वचा को शुष्क कर सकती है, खासकर खारे या क्लोरीनयुक्त पानी में। मॉइस्चराइजर का उपयोग नमी को पुनः प्राप्त करने और त्वचा की कोमलता को बनाए रखने में मदद करता है। तैराक नहाने या तैरने के तुरंत बाद मॉइस्चराइजर लगाते हैं, जब त्वचा नमी को सबसे अच्छी तरह से अवशोषित करती है। वे ऐसे मॉइस्चराइजर चुनते हैं जिनमें प्राकृतिक तेल और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो त्वचा को हाइड्रेट और पोषण देते हैं। तैराक पूरे शरीर पर मॉइस्चराइजर लगाते हैं, विशेष ध्यान उन क्षेत्रों पर देते हैं जो सूखे होने की संभावना रखते हैं, जैसे कि कोहनी, घुटने और एड़ी। नियमित मॉइस्चराइजेशन से त्वचा स्वस्थ, नरम और लचीली बनी रहती है, जिससे जलन और खुजली से बचा जा सकता है।
लगातार फोटोप्रोटेक्शन
तैराकों के लिए लगातार फोटोप्रोटेक्शन का मतलब है कि वे सूर्य की हानिकारक किरणों से अपनी त्वचा की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। यह न केवल तैराकी के दौरान महत्वपूर्ण है, बल्कि दैनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण है। तैराक हर दिन, चाहे मौसम कैसा भी हो, सनस्क्रीन लगाते हैं। वे व्यापक स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनते हैं, जो UVA और UVB दोनों किरणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। सनस्क्रीन लगाने के अलावा, तैराक अपनी त्वचा को कपड़ों से ढककर और धूप में लंबे समय तक रहने से बचकर भी फोटोप्रोटेक्शन का अभ्यास करते हैं। तैराक धूप में लंबे समय तक रहने से बचने के लिए सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच सूर्य के संपर्क से भी बचते हैं, जब किरणें सबसे मजबूत होती हैं। टोपी और धूप का चश्मा पहनने से भी सूर्य के संपर्क को कम किया जा सकता है। लगातार फोटोप्रोटेक्शन से तैराकों को त्वचा कैंसर और समय से पहले बूढ़ा होने से बचाया जाता है।















