Sikandar Raza: ज़िम्बाब्वे और भारत के बीच तीन टी20 मैचों की सीरीज 23 जुलाई से शुरू होगी। ज़िम्बाब्वे की कमान सिकंदर रजा के हाथ में है। दूसरी तरफ भारत की टीम
श्रेयस अय्यर की कप्तानी में खेलने वाली है। पाकिस्तानी सरजमीं से आकर सिकंदर रजा को कप्तानी करने का मौका मिला है। इसकी भी एक कहानी है।
दरअसल सिकंदर रजा का जन्म पाकिस्तान में ही हुआ था। वह जिम्बाब्वे में नहीं जन्मे थे। इसके अलावा एक और ख़ास बात यह है कि वह क्रिकेटर भी नहीं बनना चाहते थे। उनका सपना कुछ और था लेकिन वह शायद किस्मत में नहीं लिखा था। इस वजह से वह क्रिकेट की दुनिया में आ गए।
पाकिस्तान के पंजाब में सिकंदर रजा का जन्म सियालकोट में हुआ था। वह 24 अप्रैल 1986 को जन्मे थे। इसके बाद उनकी पढ़ाई भी वहीं हुई थी। क्रिकेटर बनने की चाहत रखने वाले पाकिस्तानी खिलाड़ी पढ़ाई में उतने होशियार नहीं होते हैं। रजा का ध्यान पढने में था।
अच्छे स्कूल से निकले सिकंदर रजा
वह एयर फ़ोर्स स्कूल मे पढाई करते थे, जो अच्छा सकूल माना जाता है। उनका सपना था कि एक दिन वह पायलट बनकर पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स में सेवा कर सके। इसी चाहत के कारण वह अपनी पढ़ाई में लगे रहते थे। उनकी अंग्रेजी स्पीकिंग भी इसका प्रमाण है कि वह अच्छी स्कूल से निकले हैं।
हालांकि पायलट बनने का सपना पूरा नहीं हो पाया और वह क्रिकेटर बन गए। दरअसल पायलटों का आँखों का टेस्ट होता है। उसमें सब ठीक होने के बाद ही इंसान को प्लेन उड़ाने के लिए योग्य माना जाता है। सिकंदर रजा यहां मात खा गए और विजन टेस्ट में फेल हो गए। इस वजह से पायलट नहीं बन पाए।
सिकंदर रजा कैसे बने ज़िम्बाब्वे में क्रिकेटर?
जब सिकंदर रजा के पिता अपने मोटर पार्ट्स का बिजनेस जिम्बाब्वे में सेट करने चले गए, तो कुछ समय बाद सिकंदर रजा को भी बुलाया। बचपन से क्रिकेट में अच्छा होने के कारण पिता ने उनको वहां किस्मत आजमाने के लिए कहा। सिकंदर रजा ने वहां क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। इससे पहले सिकंदर रजा पढाई करने स्कॉटलैंड चले गए थे, वहां भी खेलते थे।
ज़िम्बाब्वे में सिकंदर रजा ने एक ऑल राउंडर के तौर पर अपनी पहचान बना ली। बैटिंग में तूफानी खेल के अलावा वह स्पिन गेंदबाजी और शानदार फील्डिंग के कारण ज़िम्बाब्वे की टीम में आ गए और टैलेंट को देखते हुए बाद में उनको टीम की कप्तानी थमा दी गई।
भारत के खिलाफ लड़ते जंग
अब ज़िम्बाब्वे का कप्तान बनाकर वह भारत के खिलाफ खेल रहे हैं। अगर पायलट बनते तो वह भारतीय एयरफ़ोर्स से टकरा रहे होते। पिछले साल ही भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर किया था। किसे पता अगर रजा वहां पायलट होते, तो वह उस समय भारत के खिलाफ पाकिस्तान की तरफ से जंग में उतरते।
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