चैंपियन बनने पर पैसों की बारिश
फीफा वर्ल्ड कप 2026 की विजेता टीम पर पैसों की ऐसी बारिश होगी जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुई। इस बार चैंपियन बनने वाली टीम को 50 मिलियन डॉलर यानी लगभग 475 करोड़ रुपये की भारी-भरकम इनामी राशि मिलेगी। यह
2022 में कतर में हुए वर्ल्ड कप की तुलना में एक बड़ी छलांग है, जहां विजेता अर्जेंटीना को 42 मिलियन डॉलर (लगभग 347 करोड़ रुपये) मिले थे। यह दिखाता है कि फुटबॉल का यह महाकुंभ हर संस्करण के साथ कितना बड़ा और भव्य होता जा रहा है। फीफा ने 2026 के लिए कुल पुरस्कार राशि में लगभग 50% की बढ़ोतरी की है, जो फुटबॉल की बढ़ती व्यावसायिक ताकत को दर्शाता है।
हारने वाली फाइनलिस्ट भी मालामाल
फाइनल में हारने का दुख अपनी जगह है, लेकिन उपविजेता टीम भी खाली हाथ घर नहीं लौटती। 2026 वर्ल्ड कप में रनर-अप रहने वाली टीम को 33 मिलियन डॉलर, यानी करीब 314 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा, तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को 29 मिलियन डॉलर और चौथे स्थान पर रहने वाली टीम को 27 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि मिलेगी। ये आंकड़े यह साबित करते हैं कि टूर्नामेंट के अंतिम चरण तक पहुंचना न केवल प्रतिष्ठा की बात है, बल्कि यह टीमों के फुटबॉल संघों के लिए एक बहुत बड़ा वित्तीय बूस्ट भी है। 2022 में उपविजेता फ्रांस को 30 मिलियन डॉलर (लगभग 248 करोड़ रुपये) मिले थे, जो उस समय भी एक बड़ी रकम थी।
क्या सिर्फ टॉप टीमों को मिलता है पैसा?
नहीं, फीफा वर्ल्ड कप की सबसे खास बात यह है कि इसमें हिस्सा लेने वाली हर टीम को पैसा मिलता है। यह एक ऐसा टूर्नामेंट है जहां सिर्फ भागीदारी ही करोड़ों रुपये की गारंटी देती है। 2026 में, ग्रुप स्टेज से बाहर होने वाली टीमों को भी 9 मिलियन डॉलर (लगभग 86 करोड़ रुपये) मिलेंगे। इसके अलावा, हर क्वालीफाई करने वाली टीम को तैयारी के लिए 1.5 मिलियन डॉलर अलग से दिए जाते हैं। इसका मतलब है कि 48 टीमों वाले इस टूर्नामेंट में हर देश कम से कम 10.5 मिलियन डॉलर की रकम के साथ घर लौटेगा। यह राशि कई छोटे देशों के फुटबॉल के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होती है।
कुल प्राइज पूल कितना बड़ा है?
फीफा वर्ल्ड कप 2026 का कुल परफॉर्मेंस-आधारित प्राइज पूल 655 मिलियन डॉलर का है। यह 2022 के 440 मिलियन डॉलर के प्राइज पूल से बहुत ज्यादा है। समय के साथ इस राशि में जबरदस्त वृद्धि हुई है। अगर हम 2018 के टूर्नामेंट को देखें, तो कुल कमाई लगभग 53 अरब रुपये थी, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा टीमों को पुरस्कार के रूप में दिया गया था। यह लगातार बढ़ती पुरस्कार राशि दिखाती है कि वर्ल्ड कप फीफा के लिए कितना फायदेमंद है और यह खेल वैश्विक स्तर पर कितना लोकप्रिय हो चुका है। टीमों और खिलाड़ियों के लिए यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक अवसर भी है।
इतना पैसा आता कहां से है?
फीफा एक नॉन-प्रॉफिट संगठन होने का दावा करता है, लेकिन इसकी कमाई अरबों में है। इस कमाई का सबसे बड़ा स्रोत टेलीविजन और मीडिया राइट्स की बिक्री है। दुनिया भर के ब्रॉडकास्टर वर्ल्ड कप के मैचों को दिखाने के लिए भारी कीमत चुकाते हैं। इसके बाद दूसरा बड़ा जरिया मार्केटिंग राइट्स हैं, जिसमें कोका-कोला और एडिडास जैसे बड़े ब्रांड प्रायोजक बनने के लिए मोटी रकम देते हैं। टिकटों की बिक्री, खासकर वीआईपी हॉस्पिटैलिटी पैकेज, और ब्रांड लाइसेंसिंग (जैसे वीडियो गेम और मर्चेंडाइज) से भी फीफा को बड़ी कमाई होती है। इसी विशाल राजस्व का एक हिस्सा पुरस्कार राशि के रूप में टीमों को वापस दिया जाता है।











