फिल्मों वाला सपना, हकीकत से कोसों दूर
फिल्मों और कहानियों में समय का रुकना एक शानदार सुपरपावर की तरह दिखाया जाता है। हीरो समय रोककर दुनिया बचाता है, या कोई अपनी अधूरी ख्वाहिशें पूरी करता है। हम सबने कभी न कभी यह सोचा है कि काश, हमारे पास भी ऐसी
कोई डिवाइस होती जिससे हम समय को अपनी मर्जी से रोक और चला पाते। लेकिन भौतिकी के नियम इस कल्पना को इजाजत नहीं देते। अगर हम विज्ञान की नजर से देखें, तो समय का रुकना किसी वरदान से ज्यादा एक भयानक अभिशाप साबित होगा। असलियत हमारे सपनों से कहीं ज्यादा जटिल और डरावनी है।
चारों तरफ अंधेरा और खामोशी
मान लीजिए कि आपने समय रोक दिया, लेकिन आप खुद उस रुके हुए समय में चल-फिर सकते हैं। सबसे पहली और डरावनी चीज जो होगी, वह है घना अंधेरा। हमें चीजें इसलिए दिखाई देती हैं क्योंकि प्रकाश के कण यानी फोटॉन हमारी आंखों के रेटिना से टकराते हैं। अगर समय रुक गया, तो ये फोटॉन भी अपनी जगह पर जम जाएंगे। वे आगे बढ़कर आपकी आंखों तक नहीं पहुंच पाएंगे। इसका नतीजा यह होगा कि आपको कुछ भी दिखाई नहीं देगा। ठीक इसी तरह, ध्वनि तरंगों के माध्यम से यात्रा करती है। समय रुकने पर हवा के अणु भी स्थिर हो जाएंगे, जिससे ध्वनि की तरंगें आगे नहीं बढ़ पाएंगी और आप कुछ भी सुन नहीं पाएंगे। आप एक अंधी और बहरी दुनिया में कैद हो जाएंगे।
आप हिल भी नहीं पाएंगे
अगर आप यह सोच रहे हैं कि आप अंधेरे में ही सही, लेकिन चल-फिर तो लेंगे, तो आप गलत हैं। हमारा वायुमंडल हवा के अनगिनत अणुओं से भरा है। जब हम चलते हैं, तो इन अणुओं को अपने रास्ते से हटाते हुए आगे बढ़ते हैं। अगर समय रुक गया, तो हवा के ये अणु एक ठोस दीवार की तरह अपनी जगह पर जम जाएंगे। आप उनमें से होकर नहीं गुजर पाएंगे। आप जिस जगह पर हैं, वहीं पर एक मूर्ति की तरह फंस जाएंगे। यहां तक कि सांस लेना भी असंभव हो जाएगा, क्योंकि आप स्थिर हवा को अपने फेफड़ों में नहीं खींच पाएंगे।
सोचने की शक्ति भी खत्म
सबसे बुनियादी स्तर पर, हमारे विचार और हमारी चेतना भी भौतिक प्रक्रियाएं हैं। हमारे मस्तिष्क में न्यूरॉन्स के बीच होने वाले रासायनिक और विद्युत संकेतों के कारण ही हम सोच पाते हैं। ये सभी प्रक्रियाएं अणुओं की गति पर निर्भर करती हैं, और गति के लिए समय का बीतना जरूरी है। अगर समय ही रुक जाए, तो आपके मस्तिष्क की सारी गतिविधियां भी तुरंत थम जाएंगी। आप यह महसूस भी नहीं कर पाएंगे कि समय रुक गया है, क्योंकि महसूस करने की प्रक्रिया खुद ही रुक जाएगी। आप एक विचार के बीच में ही हमेशा के लिए जम जाएंगे।
तो क्या समय को धीमा किया जा सकता है?
भौतिकी के नियम समय को पूरी तरह से रोकने की इजाजत तो नहीं देते, लेकिन वे इसे धीमा करने की संभावना जरूर बताते हैं। अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार, दो स्थितियों में समय की गति धीमी हो सकती है। पहला, अगर आप प्रकाश की गति के लगभग बराबर तेजी से यात्रा करें। दूसरा, अगर आप बहुत शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में हों, जैसे कि किसी ब्लैक होल के पास। इन स्थितियों में आपके लिए समय दूसरों की तुलना में धीमी गति से बीतेगा। यह भविष्य में यात्रा करने जैसा होगा, लेकिन अतीत में जाना या समय को पूरी तरह रोकना अब भी विज्ञान के दायरे से बाहर है।













