पहला बड़ा फैसला: 'टिकी-टाका' से आगे की सोच
लुइस डे ला फुएंते ने स्पेनिश फुटबॉल की पहचान बन चुकी 'टिकी-टाका' (गेंद पर नियंत्रण और छोटे पास) की रणनीति को पूरी तरह से नहीं छोड़ा, लेकिन उसे एक नया और अधिक घातक रूप दिया। उन्होंने समझा कि सिर्फ गेंद पर कब्ज़ा
बनाए रखना जीत की गारंटी नहीं है। इसलिए, उन्होंने टीम के खेल में अधिक सीधापन और तेज़ी लाई। फुएंते ने अपनी टीम को केवल पज़ेशन के लिए नहीं, बल्कि तेज़ी से मौके बनाने और विपक्ष पर हमला करने के लिए तैयार किया। इस नई रणनीति के तहत, स्पेन ने गेंद जीतने के बाद तुरंत वर्टिकल पास खेले और विंगर्स की गति का शानदार इस्तेमाल किया। यह बदलाव टूर्नामेंट में स्पेन की सफलता का एक बड़ा कारण बना।
दूसरा बड़ा फैसला: युवा और अनुभव का सही संतुलन
किसी भी बड़े टूर्नामेंट को जीतने के लिए एक संतुलित टीम की आवश्यकता होती है, और फुएंते ने इस काम को बखूबी अंजाम दिया। उन्होंने लामिने यमल और निको विलियम्स जैसे युवा, तेज-तर्रार विंगर्स पर भरोसा दिखाया, जिन्होंने अपनी गति और ड्रिब्लिंग से विपक्षी डिफेंस को खूब परेशान किया। वहीं, मिडफील्ड में उन्होंने रॉड्री जैसे अनुभवी और परिपक्व खिलाड़ी को टीम की कमान सौंपी, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में एक दीवार की तरह प्रदर्शन किया और गोल्डन बॉल का पुरस्कार भी जीता। इसके अलावा, पाउ कुबारसी जैसे युवा डिफेंडर को टीम में शामिल करना भी एक मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। इस तरह, युवा जोश और अनुभवी स्थिरता के मिश्रण ने स्पेन को एक अजेय टीम बना दिया।
तीसरा बड़ा फैसला: मजबूत डिफेंस और टैक्टिकल लचीलापन
इस विश्व कप में स्पेन की सफलता का एक बड़ा श्रेय उनकी मजबूत रक्षा पंक्ति को जाता है। फुएंते की टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासित डिफेंस का प्रदर्शन किया और नॉकआउट के पांच मैचों में सिर्फ एक गोल खाया। उन्होंने अपनी रणनीति को प्रतिद्वंद्वी के अनुसार बदलने में भी कोई हिचक नहीं दिखाई। फुएंते ने 4-3-3 के अपने पसंदीदा फॉर्मेशन को मैच की परिस्थितियों के अनुसार 3-2-5 या 2-3-5 में भी बदला, जिससे टीम को आक्रमण और रक्षा दोनों में संतुलन मिला। फाइनल में अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी जैसे महान खिलाड़ी को रोकने के लिए उनकी बनाई रणनीति सफल रही, जहां उन्होंने किसी एक खिलाड़ी से मैन-मार्किंग कराने के बजाय पूरी टीम के जरिए मेसी को घेरे रखा।
चौथा बड़ा फैसला: टीम में एकता और आत्मविश्वास का संचार
लुइस डे ला फुएंते सिर्फ एक कोच नहीं, बल्कि एक मेंटोर भी हैं। उन्होंने टीम के भीतर एक परिवार जैसा माहौल बनाया, जहां हर खिलाड़ी टीम के लिए खेलने को तैयार था। उन्होंने खिलाड़ियों को बताया कि वे इतिहास रचने के करीब हैं और उन्हें इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। फाइनल में जब मैच अतिरिक्त समय में गया, तो फेरान टोरेस जैसे सब्स्टिट्यूट खिलाड़ी ने गोल करके यह साबित कर दिया कि फुएंते का हर खिलाड़ी पर विश्वास कितना गहरा था। फुएंते ने हमेशा टीम को किसी एक सितारे से ऊपर रखा और इसी सामूहिक भावना ने स्पेन को 38 मैचों तक अजेय रहने और विश्व कप जीतने में मदद की।











