पहला कदम: अपना रिफंड स्टेटस ऑनलाइन जांचें
रिफंड में देरी महसूस होने पर सबसे पहले उसका स्टेटस जांचना ज़रूरी है। आप यह काम दो मुख्य तरीकों से कर सकते हैं। पहला, इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने अकाउंट में लॉग इन करें। लॉग इन करने के बाद, 'e-File'
मेन्यू में 'Income Tax Returns' पर जाएं और फिर 'View Filed Returns' चुनें। यहां आपको अपनी फाइल की गई रिटर्न और उसके रिफंड का मौजूदा स्टेटस दिख जाएगा। दूसरा तरीका NSDL (अब Protean) की वेबसाइट है, जहां आप बिना लॉग इन किए सिर्फ अपना पैन नंबर और असेसमेंट ईयर डालकर भी स्टेटस देख सकते हैं। इससे आपको यह स्पष्टता मिलेगी कि आपकी रिटर्न प्रोसेस हुई है या नहीं, और रिफंड जारी हुआ है या विफल हो गया है।
दूसरा कदम: ITR का ई-वेरिफिकेशन सुनिश्चित करें
आईटीआर फाइलिंग की प्रक्रिया सिर्फ रिटर्न सबमिट करने पर खत्म नहीं होती। इसे ई-वेरिफाई करना अनिवार्य है। अगर आपने आईटीआर फाइल करने के 30 दिनों के भीतर उसे ई-वेरिफाई नहीं किया है, तो आपकी रिटर्न को 'अमान्य' (Invalid) माना जाएगा और रिफंड की प्रक्रिया शुरू ही नहीं होगी। यह देरी का एक बहुत ही आम कारण है। आप आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या डीमैट अकाउंट के ज़रिए आसानी से ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं। अपने ई-फाइलिंग अकाउंट में लॉग इन करके यह सुनिश्चित करें कि आपकी रिटर्न सफलतापूर्वक वेरिफाइड है। अगर नहीं, तो इस प्रक्रिया को तुरंत पूरा करें।
तीसरा कदम: बैंक खाते की जानकारी को दोबारा जांचें
रिफंड फेल होने का एक और बड़ा कारण बैंक खाते की गलत जानकारी है। इनकम टैक्स विभाग अब सिर्फ उन्हीं बैंक खातों में रिफंड भेजता है जो आपके पैन से लिंक हों और ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'प्री-वैलिडेटेड' हों। आपको यह जांचना चाहिए कि पोर्टल पर दिया गया आपका बैंक खाता नंबर, IFSC कोड और आपका नाम सही है या नहीं। कई बार खाता बंद हो जाने, निष्क्रिय होने या नाम में मामूली अंतर (PAN और बैंक रिकॉर्ड में) होने से भी रिफंड फेल हो जाता है। अगर ऐसा है, तो पोर्टल पर जाकर सही बैंक खाते को अपडेट करें और उसे रिफंड के लिए नामांकित करें, फिर 'रिफंड री-इश्यू' की रिक्वेस्ट डालें।
चौथा कदम: फॉर्म 26AS और AIS से मिलान करें
अगर आपके द्वारा ITR में क्लेम किए गए TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) और आपके फॉर्म 26AS या एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दिख रहे आंकड़ों में कोई अंतर है, तो विभाग रिफंड को रोक सकता है। विभाग इन सभी दस्तावेज़ों का मिलान करता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपने सही टैक्स क्रेडिट का दावा किया है। प्रोसेसिंग में देरी से बचने के लिए, हमेशा यह सलाह दी जाती है कि आईटीआर भरने से पहले अपने फॉर्म 26AS और AIS को अच्छी तरह से जांच लें और यह सुनिश्चित करें कि सभी आय और टैक्स कटौती की जानकारी सही-सही मेल खाती है।
पांचवां कदम: किसी बकाया टैक्स मांग की जांच करें
कई बार आयकर विभाग आपके रिफंड को किसी पुराने असेसमेंट ईयर की बकाया टैक्स मांग के सामने एडजस्ट कर लेता है। अगर ऐसा होता है, तो विभाग आपको सेक्शन 143(1) के तहत एक सूचना (Intimation) भेजकर इस समायोजन के बारे में सूचित करता है। आपको अपने ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करके 'Refund/Demand Status' या 'Response to Outstanding Demand' सेक्शन में यह जांचना चाहिए कि कहीं आपके नाम पर कोई पुरानी मांग तो नहीं है। अगर कोई मांग है, तो रिफंड या तो पूरी तरह से या आंशिक रूप से एडजस्ट किया जा सकता है।
अंतिम उपाय: शिकायत दर्ज करें
अगर ऊपर दिए गए सभी कदम उठाने के बाद भी आपको कोई समाधान नहीं मिलता है और रिफंड में अनुचित देरी हो रही है, तो आप आयकर विभाग के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए आप ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'e-Nivaran' सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। यहां आप अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, संबंधित दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं और अपनी शिकायत की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, आप आयकर विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं।














