दूसरों से तुलना करना
अपने पार्टनर की तुलना किसी और से करना, चाहे वो आपका कोई पूर्व प्रेमी/प्रेमिका हो, दोस्त हो या किसी और का पार्टनर, रिश्ते के लिए सबसे ज़्यादा नुकसानदायक है। जब आप कहते हैं, "वो तो ऐसा नहीं करता/करती" या "तुम्हें
उनसे कुछ सीखना चाहिए", तो आप अनजाने में अपने पार्टनर को यह महसूस कराते हैं कि वे आपके लिए काफी नहीं हैं। इससे उनका आत्मविश्वास कम होता है और उन्हें लगता है कि आप उनकी कद्र नहीं करते। हर व्यक्ति अलग होता है और उसकी अपनी खासियत होती है। तुलना करना उस व्यक्ति के अद्वितीय व्यक्तित्व का अपमान करने जैसा है, जिसे आपने खुद अपने जीवन के लिए चुना है। यह धीरे-धीरे रिश्ते में असुरक्षा और कड़वाहट घोल देता है।
बार-बार ब्रेकअप की धमकी देना
छोटी-छोटी बातों या लड़ाई-झगड़ों में रिश्ता तोड़ने की धमकी देना एक बहुत ही खराब आदत है। यह दिखाता है कि आप रिश्ते को लेकर गंभीर नहीं हैं और मुश्किल समय में भाग खड़े होना चाहते हैं। जब आप बार-बार "मैं तुम्हें छोड़ दूँगा/दूँगी" या "अब यह रिश्ता खत्म" जैसी बातें कहते हैं, तो पार्टनर के मन में एक स्थायी डर बैठ जाता है। उन्हें लगने लगता है कि यह रिश्ता कभी भी टूट सकता है। इस वजह से वे रिश्ते में अपना सौ प्रतिशत देना बंद कर देते हैं। यह धमकी रिश्ते की नींव को खोखला कर देती है और विश्वास को पूरी तरह से खत्म कर देती है। समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करें, न कि रिश्ते को दांव पर लगाएं।
उनके परिवार या दोस्तों का अपमान करना
आपके पार्टनर के लिए उनका परिवार और दोस्त बहुत मायने रखते हैं। हो सकता है कि आप उनके कुछ दोस्तों या परिवार के सदस्यों को पसंद न करते हों, लेकिन उनका अपमान करना सीधे तौर पर अपने पार्टनर को चोट पहुँचाना है। "तुम्हारी माँ हमेशा यही करती हैं" या "तुम्हारा वो दोस्त मुझे बिल्कुल पसंद नहीं" जैसी बातें कहकर आप उन्हें एक मुश्किल स्थिति में डाल देते हैं, जहाँ उन्हें आपके और अपने प्रियजनों के बीच किसी एक को चुनना पड़ता है। यह बहुत ज़्यादा तनाव पैदा करता है और रिश्ते में दरार डाल सकता है। अगर आपको कोई समस्या है भी, तो उसे सम्मानजनक तरीके से बताएं, न कि अपमानजनक लहजे में।
पुरानी गलतियों को बार-बार याद दिलाना
हर किसी से गलतियाँ होती हैं। अगर आपके पार्टनर से कोई गलती हुई थी, जिस पर बात हो चुकी है और आपने उन्हें माफ़ कर दिया है, तो उसे बार-बार कुरेदना बंद करें। जब भी कोई नई बहस होती है, तो पुरानी बातों को हथियार की तरह इस्तेमाल करना रिश्ते के लिए ज़हर की तरह काम करता है। इससे यह संदेश जाता है कि आपने असल में उन्हें कभी माफ़ किया ही नहीं था। यह आपके पार्टनर को लगातार दोषी महसूस कराता है और वे कभी भी खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। एक स्वस्थ रिश्ते का आधार माफ़ करके आगे बढ़ना होता है, न कि अतीत के बोझ तले दबकर जीना।
'तुम हमेशा...' या 'तुम कभी नहीं...' कहना
ये शब्द किसी भी बातचीत को तुरंत नकारात्मक बना देते हैं। जब आप कहते हैं, "तुम हमेशा देर से आते हो" या "तुम मेरी बात कभी नहीं सुनते", तो आप एक घटना के आधार पर उनके पूरे चरित्र पर सवाल उठा रहे होते हैं। यह बातें अतिशयोक्तिपूर्ण होती हैं और सच भी नहीं होतीं। ऐसा कहने से आपका पार्टनर तुरंत defensiveness (बचाव की मुद्रा) में आ जाता है और आपकी असल बात सुनने की बजाय खुद का बचाव करने लगता है। इसके बजाय, उस ख़ास घटना पर ध्यान केंद्रित करें। कहें, "जब तुम आज देर से आए तो मुझे बुरा लगा"। इससे बातचीत समस्या पर केंद्रित रहती है, व्यक्ति पर नहीं।
उनकी भावनाओं को कम आंकना
जब आपका पार्टनर किसी बात से दुखी या परेशान हो, तो "तुम बेवजह परेशान हो रहे हो" या "इसमें इतनी बड़ी क्या बात है?" जैसे वाक्य कभी न कहें। ऐसा कहकर आप उनकी भावनाओं को अमान्य कर रहे हैं। यह उन्हें महसूस कराता है कि आप उनकी भावनाओं को समझते नहीं हैं या उनकी परवाह नहीं करते। हर किसी का किसी स्थिति पर प्रतिक्रिया करने का तरीका अलग होता है। एक सहयोगी पार्टनर का काम यह समझना है कि उनका साथी कैसा महसूस कर रहा है, भले ही आप खुद वैसा महसूस न करें। उनकी भावनाओं को सुनें, उन्हें मान्यता दें और पूछें कि आप उनकी मदद कैसे कर सकते हैं।














