शुरुआती दौर और फॉनटेन का अटूट रिकॉर्ड
गोल्डन बूट का इतिहास 1930 में उरुग्वे में हुए पहले विश्व कप से ही शुरू हो गया था। अर्जेंटीना के गुइलेर्मो स्टाबिले 8 गोल के साथ पहले शीर्ष स्कोरर बने। हालांकि, इस पुरस्कार को आधिकारिक तौर पर 1982 में 'गोल्डन
शू' के नाम से शुरू किया गया था, जिसे 2010 में 'गोल्डन बूट' नाम दिया गया। फीफा अब पूर्वव्यापी रूप से सभी शीर्ष स्कोरर को विजेता के रूप में मान्यता देता है। इस शुरुआती दौर का सबसे बड़ा सितारा फ्रांस के जस्ट फॉनटेन थे। उन्होंने 1958 के विश्व कप में सिर्फ 6 मैचों में 13 गोल दाग दिए थे। यह आज भी एक ही विश्व कप में किसी खिलाड़ी द्वारा बनाए गए सबसे ज़्यादा गोल का रिकॉर्ड है, जो शायद ही कभी टूटे।
जब महान खिलाड़ियों ने साझा किया सम्मान
1994 तक, अगर एक से ज़्यादा खिलाड़ी बराबर गोल करते थे, तो पुरस्कार साझा किया जाता था। इसका सबसे अनोखा उदाहरण 1962 के चिली विश्व कप में देखने को मिला, जब हंगरी के फ्लोरियन अल्बर्ट, सोवियत संघ के वैलेन्टिन इवानोव, ब्राजील के गैरिंचा और वावा, यूगोस्लाविया के ड्रेज़न जेरकोविच और चिली के लियोनेल सांचेज़ सहित छह खिलाड़ी 4-4 गोल के साथ संयुक्त विजेता बने। इसी दौर में फुटबॉल के कुछ महानतम खिलाड़ियों ने भी यह पुरस्कार जीता। पुर्तगाल के महान खिलाड़ी यूसेबियो ने 1966 में 9 गोल करके गोल्डन बूट अपने नाम किया, जबकि पश्चिम जर्मनी के महान स्ट्राइकर गर्ड मुलर ने 1970 में 10 गोल दागकर दुनिया को अपनी गोल करने की क्षमता का लोहा मनवाया।
आधुनिक युग और टाई-ब्रेकर के नियम
1982 में जब इस पुरस्कार को आधिकारिक तौर पर पेश किया गया, तो इटली के पाउलो रॉसी इसके पहले विजेता बने। उन्होंने 6 गोल करके इटली को विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके बाद 1986 में इंग्लैंड के गैरी लिनेकर ने 6 गोल के साथ यह खिताब जीता। 1994 से, फीफा ने टाई की स्थिति में एक स्पष्ट विजेता निर्धारित करने के लिए नियम बदले। इसके तहत ज़्यादा असिस्ट करने वाले खिलाड़ी को विजेता घोषित किया जाने लगा। हालांकि, 1994 में ही रूस के ओलेग सालेंको और बुल्गारिया केristo Stoichkov 6 गोल और 1 असिस्ट के साथ बराबरी पर रहे और पुरस्कार साझा किया गया। सालेंको आज भी एकमात्र ऐसे गोल्डन बूट विजेता हैं जिनकी टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी।
21वीं सदी के गोल मशीन
नई सदी में कई दिग्गज स्ट्राइकरों ने गोल्डन बूट पर अपना नाम लिखवाया। ब्राजील के रोनाल्डो नाज़ारियो ने 2002 में 8 गोल करके अपनी टीम को विश्व विजेता बनाया और गोल्डन बूट जीता। 2006 में जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोस ने 5 गोल के साथ यह पुरस्कार जीता। 2010 में एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला जब जर्मनी के थॉमस मुलर, स्पेन के डेविड विया, नीदरलैंड्स के वेस्ली स्नाइडर और उरुग्वे के डिएगो फोरलान, सभी ने 5-5 गोल किए। मुलर को उनके ज़्यादा असिस्ट (3) के कारण विजेता घोषित किया गया। इसके बाद 2014 में कोलंबिया के जेम्स रोड्रिगेज (6 गोल) और 2018 में इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन (6 गोल) ने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता।
2022 में एमबाप्पे की बादशाहत
क़तर में 2022 का विश्व कप गोल्डन बूट की एक यादगार दौड़ के लिए जाना जाएगा। मुकाबला फ्रांस के युवा सुपरस्टार किलियन एमबाप्पे और अर्जेंटीना के दिग्गज लियोनेल मेसी के बीच था। फाइनल से पहले दोनों खिलाड़ी बराबरी पर थे, लेकिन फाइनल में एक अविश्वसनीय हैट्रिक लगाकर एमबाप्पे ने कुल 8 गोल के साथ गोल्डन बूट अपने नाम कर लिया। मेसी 7 गोल के साथ दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर बूट से संतोष करना पड़ा। एमबाप्पे फाइनल में हैट्रिक बनाने वाले इतिहास के दूसरे खिलाड़ी बने, लेकिन उनकी टीम खिताब बचाने में नाकाम रही।











