गुरेज वैली, कश्मीर
कश्मीर में श्रीनगर से लगभग 123 किलोमीटर दूर स्थित गुरेज वैली किसी जन्नत से कम नहीं है। यह घाटी बहुत हद तक पर्यटकों की नजरों से बची हुई है, इसलिए यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता अपने असल रूप में मौजूद है। किशनगंगा
नदी के किनारे बसी यह घाटी सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण दुनिया से कट जाती है, लेकिन गर्मियों में यहाँ हरे-भरे घास के मैदान, ऊँचे-ऊँचे देवदार के पेड़ और बर्फ से ढकी चोटियों का नज़ारा देखने लायक होता है। यहाँ की हब्बा खातून चोटी के पीछे एक दिलचस्प कहानी है, जो इसे और भी खास बनाती है। आप यहाँ ट्रेकिंग, कैंपिंग और स्थानीय 'दर्द' जनजाति की संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं। यहाँ पहुँचने के लिए राजदान दर्रे से होकर गुजरना पड़ता है, जो अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है।
चोपटा, उत्तराखंड
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित चोपटा को 'भारत का मिनी स्विट्जरलैंड' भी कहा जाता है। यह जगह अपनी शांत, हरी-भरी वादियों और हिमालय की चोटियों के मनोरम दृश्यों के लिए जानी जाती है। चोपटा, तुंगनाथ मंदिर (दुनिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर) और चंद्रशिला ट्रेक के लिए शुरुआती बिंदु है। यहाँ देवदार, बुरांश और ओक के घने जंगल हैं, जो इसे प्रकृति प्रेमियों और पक्षी देखने वालों के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं। भीड़-भाड़ वाले हिल स्टेशनों के विपरीत, चोपटा में आपको शांति और सुकून का एहसास होगा। यहाँ से नंदा देवी, त्रिशूल और चौखम्बा जैसी चोटियों का स्पष्ट दृश्य दिखाई देता है। आप पास में स्थित देवरिया ताल झील की यात्रा भी कर सकते हैं, जो अपने क्रिस्टल जैसे साफ पानी के लिए प्रसिद्ध है।
जिरो वैली, अरुणाचल प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश में स्थित जिरो वैली यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है। यह घाटी अपनी खास अपतानी जनजाति, उनके पारंपरिक रहन-सहन और धान-मछली की एक साथ खेती की अनूठी प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है। चारों ओर से चीड़ के पेड़ों से घिरी यह घाटी बेहद शांत और खूबसूरत है। यहाँ के हरे-भरे धान के खेत और पारंपरिक बांस के घर एक अलग ही दुनिया का एहसास कराते हैं। यहाँ का मौसम साल भर सुहावना रहता है, लेकिन मार्च से मई और अक्टूबर से नवंबर के बीच यहाँ घूमना सबसे अच्छा माना जाता है। जिरो वैली की यात्रा के लिए भारतीय पर्यटकों को इनर लाइन परमिट (ILP) की आवश्यकता होती है। अगर आप एक अनोखी सांस्कृतिक और प्राकृतिक खूबसूरती का अनुभव करना चाहते हैं, तो जिरो आपके लिए एक आदर्श जगह है।
माजुली, असम
असम में ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित माजुली दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप है। यह द्वीप असम की नव-वैष्णव संस्कृति का केंद्र है और यहाँ कई 'सत्र' (मठ) हैं, जहाँ आप सदियों पुरानी कलाओं, जैसे मुखौटा बनाने की कला और सत्रीया नृत्य को देख सकते हैं। माजुली का जीवन बहुत सरल और प्रकृति के करीब है। यहाँ के लोग मिसिंग जनजाति के हैं, जो अपने खास बांस के बने ऊँचे घरों में रहते हैं। नाव की सवारी, सूर्यास्त के खूबसूरत नज़ारे और स्थानीय लोगों का मेहमाननवाज व्यवहार इस जगह को अविस्मरणीय बना देता है। हालांकि, नदी के कटाव के कारण इस द्वीप का अस्तित्व खतरे में है, इसलिए इसे देखने का यह सही समय हो सकता है। यहाँ पहुँचने के लिए जोरहाट के निमाती घाट से फेरी लेनी पड़ती है।
गंडीकोटा, आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के कडपा जिले में पेन्ना नदी के किनारे स्थित गंडीकोटा को 'भारत का ग्रैंड कैनियन' कहा जाता है। यहाँ पेन्ना नदी एक गहरी घाटी से होकर गुजरती है, जिसका नज़ारा अद्भुत होता है। यह जगह अभी तक ज्यादा पर्यटकों के बीच लोकप्रिय नहीं हुई है, इसलिए यहाँ की खूबसूरती शांत और अनछुई है। गंडीकोटा का किला 13वीं शताब्दी का है, जिसके अंदर एक मस्जिद, दो मंदिर और एक पुराना अन्न भंडार भी है। आप यहाँ चट्टानों के किनारे कैंपिंग का आनंद ले सकते हैं और सूर्योदय व सूर्यास्त के शानदार नज़ारे देख सकते हैं। इतिहास और रोमांच का यह अनूठा संगम आपको एक अलग ही अनुभव देगा। यहाँ से कुछ ही दूरी पर बेलम गुफाएँ भी हैं, जो भारत की दूसरी सबसे लंबी गुफाएँ हैं।














