सबसे पहले, यह जीडीपी आखिर है क्या?
जीडीपी यानी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (सकल घरेलू उत्पाद) को किसी देश की आर्थिक सेहत का पैमाना माना जाता है। इसे ऐसे समझें - एक साल के अंदर देश की सीमाओं के भीतर बनी सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाज़ार मूल्य
ही जीडीपी है। यह देश की कुल कमाई का एक मोटा-मोटा हिसाब है। जब सरकार कहती है कि जीडीपी बढ़ रही है, तो इसका मतलब है कि देश में कुल मिलाकर ज्यादा मूल्य का सामान और सेवाएं बन रही हैं। यह एक अच्छी खबर है, लेकिन यह पूरी कहानी नहीं बताती। यह सिर्फ केक के आकार के बारे में बताती है, यह नहीं कि किसे कितना बड़ा टुकड़ा मिल रहा है।
सबसे बड़ा कारण - आय की असमानता
जीडीपी बढ़ने के बावजूद आम आदमी तक उसका फायदा न पहुँचने का सबसे बड़ा कारण आय और संपत्ति की असमानता है। इसका मतलब है कि आर्थिक विकास का एक बड़ा हिस्सा देश के कुछ मुट्ठी भर अमीर लोगों या बड़े कॉर्पोरेट घरानों की तिजोरी में चला जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में शीर्ष 10% आबादी के पास देश की कुल संपत्ति का 77% से अधिक हिस्सा है। जब विकास का लाभ इस तरह कुछ ही जगहों पर केंद्रित हो जाता है, तो भले ही देश का औसत ऊपर उठता दिखे, लेकिन बड़ी आबादी को उसका कोई खास फायदा महसूस नहीं होता। उनकी आय या तो स्थिर रहती है या बहुत धीमी गति से बढ़ती है।
महंगाई का अदृश्य डाका
आपकी कमाई बढ़ने से ज्यादा जरूरी है कि आपकी खरीदने की क्षमता बढ़े। यहीं पर महंगाई या मुद्रास्फीति का खेल शुरू होता है। मान लीजिए आपकी सालाना आय 5% बढ़ी, लेकिन उसी दौरान महंगाई 7% बढ़ गई। तो असल में आपकी कमाई बढ़ने के बजाय 2% घट गई है। जीडीपी के आंकड़े नॉमिनल (बिना महंगाई के असर को हटाए) और रियल (महंगाई के असर को हटाकर) दोनों होते हैं। जब हम बढ़ती कीमतों के दौर से गुजरते हैं, तो बढ़ी हुई जीडीपी का एक हिस्सा सिर्फ कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से होता है, न कि वास्तविक उत्पादन बढ़ने से। आम आदमी की बचत और खर्च करने की क्षमता पर इसका सीधा नकारात्मक असर पड़ता है।
बढ़ती आबादी और प्रति व्यक्ति आय का गणित
जीडीपी पूरे देश की कुल आय है। लेकिन हर व्यक्ति की स्थिति समझने के लिए हमें प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) को देखना होता है। इसे देश की कुल जीडीपी को उसकी कुल जनसंख्या से भाग देकर निकाला जाता है। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। इसलिए, जब जीडीपी बढ़ती है, तो उसका बंटवारा भी एक बड़ी आबादी के बीच होता है। अगर जीडीपी बढ़ने की रफ्तार जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार से बहुत ज्यादा तेज नहीं है, तो प्रति व्यक्ति आय में कोई खास बढ़ोतरी नहीं दिखती। यही कारण है कि देश की अर्थव्यवस्था दुनिया में 5वें या चौथे स्थान पर होने के बावजूद, प्रति व्यक्ति आय के मामले में हम कई देशों से पीछे हैं।
विकास की गुणवत्ता और रोजगार
यह भी बहुत मायने रखता है कि जीडीपी में बढ़ोतरी किन क्षेत्रों से हो रही है। अगर विकास ऐसे क्षेत्रों में हो रहा है जिनमें बहुत कम लोगों को रोजगार मिलता है (जैसे अत्यधिक ऑटोमेटेड उद्योग या वित्तीय बाजार), तो इसका फायदा सीमित लोगों तक ही पहुंचता है। इसे 'जॉबलेस ग्रोथ' भी कहते हैं। वहीं, अगर विकास कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और छोटे उद्योगों जैसे ज्यादा रोजगार देने वाले क्षेत्रों में होता है, तो उसका फायदा ज्यादा लोगों तक पहुंचता है और आम आदमी की आय बढ़ती है। इसलिए सिर्फ जीडीपी का आंकड़ा ही नहीं, बल्कि विकास की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।












