क्या आपके लिए ITR फाइल करना जरूरी है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ITR फाइलिंग की अनिवार्यता आपकी सालाना आय पर निर्भर करती है। आयकर नियमों के अनुसार, अगर आपकी कुल वार्षिक आय मूल छूट सीमा (Basic Exemption Limit) से अधिक है, तो आपको ITR फाइल करना
अनिवार्य है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, नई टैक्स व्यवस्था के तहत यह सीमा 4 लाख रुपये है, जबकि पुरानी टैक्स व्यवस्था में 60 वर्ष से कम आयु वालों के लिए यह 2.5 लाख रुपये है। अगर आपकी आय इस सीमा से कम है, तो कानूनी तौर पर ITR फाइल करना आपके लिए अनिवार्य नहीं है। लेकिन, विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि आय कम होने पर भी ITR फाइल करना एक बहुत अच्छी वित्तीय आदत है जिसके कई फायदे हैं।
कम आय के बावजूद इन स्थितियों में ITR अनिवार्य है
कई बार आपकी आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, फिर भी कुछ शर्तों के कारण आपको ITR फाइल करना पड़ सकता है। यदि आपने इनमें से कोई भी काम किया है, तो रिटर्न भरना जरूरी हो जाता है: एक वित्तीय वर्ष में अपने एक या अधिक बचत खातों में 50 लाख रुपये या उससे अधिक जमा किए हों। एक या अधिक चालू खातों (Current Accounts) में कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये से अधिक जमा किए हों। यदि आपके कारोबार का कुल टर्नओवर 60 लाख रुपये से अधिक है। अगर आपने सालभर में विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से ज़्यादा खर्च किए हैं। यदि आपका सालाना बिजली का बिल 1 लाख रुपये से अधिक आया है। अगर आपका कुल TDS (स्रोत पर कर कटौती) या TCS (स्रोत पर कर संग्रह) एक साल में 25,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये) से अधिक है। यदि आप भारत के निवासी हैं और विदेश में आपकी कोई संपत्ति या किसी खाते में हस्ताक्षर का अधिकार है।
TDS रिफंड के लिए ITR है एकमात्र रास्ता
पहली नौकरी करने वालों के लिए यह सबसे आम स्थिति है। कई कंपनियाँ कर्मचारी की सैलरी पर TDS काटती हैं, भले ही उनकी कुल आय टैक्स योग्य न हो। उदाहरण के लिए, अगर आपकी सालाना आय 4 लाख रुपये से कम है, लेकिन कंपनी ने कुछ टैक्स काट लिया है, तो उस काटे गए टैक्स को वापस पाने का एकमात्र तरीका ITR फाइल करना ही है। ITR के जरिए आप सरकार को बताते हैं कि आपकी आय टैक्स योग्य नहीं थी और काटा गया अतिरिक्त टैक्स आपको वापस (रिफंड) किया जाना चाहिए।
ITR फाइलिंग: भविष्य के लिए एक मजबूत कदम
ITR फाइल करना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आपके वित्तीय भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है। इसके कई दूरगामी फायदे हैं जो आपके करियर की शुरुआत में ही एक मजबूत आधार तैयार करते हैं। लोन लेने में आसानी: भविष्य में जब आप होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के लिए आवेदन करेंगे, तो बैंक आपकी आय के प्रमाण के तौर पर पिछले 2-3 वर्षों के ITR रिकॉर्ड मांगते हैं। यह आपकी वित्तीय स्थिरता को साबित करता है। वीजा आवेदन में सहायक: अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा जैसे कई देशों में वीजा आवेदन के समय पिछले वर्षों के ITR की कॉपी मांगी जाती है। यह आपकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है और वीजा मिलने की संभावनाओं को बढ़ाता है। आय और पते का आधिकारिक प्रमाण: ITR की रसीद एक सरकारी तौर पर स्वीकृत आय और पते का प्रमाण पत्र है। इसे कई जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। बड़ा बीमा कवर लेने में मददगार: अगर आप कोई बड़ी जीवन बीमा पॉलिसी या टर्म प्लान लेना चाहते हैं, तो बीमा कंपनियां आपकी आय की पुष्टि के लिए ITR रिकॉर्ड्स को प्राथमिकता देती हैं।
पहली बार कैसे फाइल करें ITR?
पहली बार ITR फाइल करना अब काफी आसान हो गया है। आप खुद भी आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होगी: पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण, और सबसे महत्वपूर्ण 'फॉर्म 16'। फॉर्म 16 आपको आपकी कंपनी (नियोक्ता) द्वारा दिया जाता है, जिसमें आपकी सैलरी और काटे गए TDS का पूरा ब्योरा होता है। पोर्टल पर रजिस्टर करने के बाद, आपको सही ITR फॉर्म (आमतौर पर वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ITR-1) चुनना होता है और फॉर्म 16 व अन्य दस्तावेजों से जानकारी भरनी होती है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपने रिटर्न को ई-वेरिफाई करना न भूलें, जिसके लिए 30 दिन का समय मिलता है।














