आदित्य चोपड़ा का हॉलीवुड ड्रीम
यह सुनने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन यह सच है कि निर्देशक आदित्य चोपड़ा ने जब पहली बार DDLJ की कहानी सोची थी, तो यह एक भारतीय-विदेशी प्रेम कहानी थी। उनका विचार एक अमेरिकी लड़के और एक भारतीय लड़की के बीच
पनपते प्यार को दर्शाने का था। इस बड़ी सोच के साथ, उनके मन में मुख्य किरदार 'राज' के लिए हॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में से एक, टॉम क्रूज का नाम था। आदित्य चोपड़ा का सपना इस फिल्म के जरिए भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना था, और उन्हें लगा कि एक विदेशी किरदार के नजरिए से यह कहानी कहना सबसे प्रभावशाली तरीका होगा। हालांकि, यह विचार केवल एक शुरुआती कल्पना बनकर रह गया।
यश चोपड़ा का देसी विजन
जब आदित्य ने अपने पिता, महान फिल्म निर्माता यश चोपड़ा के साथ इस विचार को साझा किया, तो उन्हें एक अलग दृष्टिकोण मिला। यश चोपड़ा एक विदेशी सितारे को मुख्य भूमिका में लेने के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि कहानी का दिल भारतीय होना चाहिए और मुख्य किरदारों को भारतीय दर्शकों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने आदित्य को कहानी पर फिर से काम करने और नायक को एक एनआरआई (अनिवासी भारतीय) बनाने की सलाह दी। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ था जिसने फिल्म की पूरी रूपरेखा बदल दी। पिता की सलाह मानकर, आदित्य ने कहानी को एक भारतीय लड़के के इर्द-गिर्द फिर से लिखा जो विदेश में पला-बढ़ा है, लेकिन जिसके मूल्य पूरी तरह से भारतीय हैं।
जब शाहरुख खान ने कहा 'ना'
टॉम क्रूज का विचार छोड़ने के बाद, आदित्य चोपड़ा ने शाहरुख खान से संपर्क किया। उस समय शाहरुख 'डर' और 'बाजीगर' जैसी फिल्मों में अपने एंटी-हीरो किरदारों के लिए जाने जाते थे। जब उन्होंने DDLJ की कहानी सुनी, तो उन्हें राज का किरदार बहुत नरम और 'लड़की जैसा' लगा। वह एक रोमांटिक हीरो की भूमिका निभाने में झिझक रहे थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि यह उनकी एक्शन हीरो की छवि के अनुकूल नहीं है। शाहरुख ने कई मुलाकातों के बाद भी इस भूमिका के लिए हामी नहीं भरी। इस बीच, आदित्य ने सैफ अली खान से भी संपर्क किया, लेकिन उन्होंने भी अज्ञात कारणों से इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
आखिरकार कैसे माने 'किंग खान'?
आदित्य चोपड़ा ने हार नहीं मानी। वह महीनों तक शाहरुख को मनाने की कोशिश करते रहे। निर्णायक क्षण तब आया जब यश चोपड़ा ने खुद शाहरुख से बात की। उन्होंने शाहरुख को समझाया कि अगर वह देश में एक सच्चा सुपरस्टार बनना चाहते हैं, तो उन्हें एक रोमांटिक हीरो बनना होगा—एक ऐसा नायक जो "हर माँ का सपना और हर लड़की की कल्पना" हो। सलमान खान ने भी शाहरुख को यह भूमिका करने के लिए प्रोत्साहित किया था, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि यह फिल्म बहुत बड़ी हिट होगी। इन बातों का शाहरुख पर गहरा असर हुआ और आखिरकार, उन्होंने 'राज मल्होत्रा' के किरदार के लिए हाँ कह दी।
और फिर रचा गया इतिहास
शाहरुख खान का हाँ कहना भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ। फिल्म 1995 में रिलीज हुई और तुरंत एक ब्लॉकबस्टर बन गई। इसने न केवल शाहरुख खान को 'किंग ऑफ रोमांस' के रूप में स्थापित किया, बल्कि यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाली फिल्म भी बन गई, जो मुंबई के मराठा मंदिर थिएटर में दशकों तक दिखाई गई। राज और सिमरन की जोड़ी एक सांस्कृतिक घटना बन गई और फिल्म ने 10 फिल्मफेयर पुरस्कार जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। आज यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि शाहरुख के अलावा कोई और 'राज' की भूमिका निभा सकता था, लेकिन कास्टिंग की यह अनसुनी कहानी फिल्म की विरासत को और भी दिलचस्प बना देती है।













