लोन और ब्याज का गणित समझें
किसी भी लोन को चुकाने की रणनीति बनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि उसका ब्याज कैसे काम करता है। ज़्यादातर लोन 'रिड्यूसिंग बैलेंस' मेथड पर काम करते हैं, जिसमें आपकी ईएमआई का एक बड़ा हिस्सा शुरुआती सालों में ब्याज चुकाने में जाता
है और मूलधन (प्रिंसिपल) बहुत धीरे-धीरे कम होता है। जैसे-जैसे समय बीतता है, ईएमआई में ब्याज का हिस्सा घटता है और मूलधन का बढ़ता है। इसीलिए, अगर आप लोन जल्दी चुकाना चाहते हैं तो शुरुआती वर्षों में उठाए गए कदम सबसे ज्यादा असरदार होते हैं। लंबी अवधि का लोन चुनने पर ईएमआई भले ही कम लगती हो, लेकिन कुल मिलाकर आप कहीं ज्यादा ब्याज चुकाते हैं।
प्रीपेमेंट (पूर्व-भुगतान): सबसे असरदार हथियार
प्रीपेमेंट का मतलब है कि आप अपनी नियमित ईएमआई के अलावा एकमुश्त रकम का भुगतान करते हैं। यह पैसा सीधे आपके मूलधन से घट जाता है, जिससे भविष्य में लगने वाला ब्याज अपने आप कम हो जाता है। मान लीजिए आपको ऑफिस से बोनस मिला है या कहीं से अतिरिक्त आमदनी हुई है, तो उसे फिजूलखर्च करने की बजाय लोन का आंशिक भुगतान करने में इस्तेमाल करना एक स्मार्ट फैसला है। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर बैंक प्रीपेमेंट पेनाल्टी नहीं ले सकते। प्रीपेमेंट करने के बाद आपके पास दो विकल्प होते हैं: या तो आप अपनी ईएमआई कम करवा लें या फिर लोन की अवधि (टेन्योर) कम कर दें। अगर आप ब्याज पर अधिकतम बचत करना चाहते हैं तो अवधि कम करवाना हमेशा बेहतर विकल्प होता है।
अपनी EMI स्वेच्छा से बढ़ाएं
अगर आपकी आय बढ़ गई है, तो अपने बैंक से कहकर अपनी ईएमआई की राशि बढ़वा लेना एक बहुत ही कारगर तरीका है। थोड़ी सी बढ़ी हुई ईएमआई भी आपके मूलधन को तेजी से कम करती है, जिससे लोन की अवधि काफी घट जाती है और आप लाखों रुपये का ब्याज बचा लेते हैं। यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन रणनीति है जिनकी आय स्थिर है और वे हर महीने एक निश्चित अतिरिक्त राशि का भुगतान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, हर साल अपनी सैलरी बढ़ने पर ईएमआई में 5-10% की बढ़ोतरी करने का लक्ष्य रखें। यह छोटा कदम लंबे समय में एक बड़ा अंतर पैदा करेगा।
बैलेंस ट्रांसफर पर विचार करें
अगर आपने कुछ साल पहले लोन लिया था और तब से ब्याज दरें कम हो गई हैं, तो आप 'बैलेंस ट्रांसफर' का फायदा उठा सकते हैं। इसका मतलब है कि आप अपने मौजूदा लोन को किसी दूसरे बैंक या वित्तीय संस्थान में ट्रांसफर करवा लेते हैं जो आपको कम ब्याज दर ऑफर कर रहा हो। ब्याज दर में 0.5% की कमी भी आपको लंबे समय में लाखों रुपये बचा सकती है। हालांकि, बैलेंस ट्रांसफर करने से पहले प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों की गणना जरूर कर लें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह वाकई एक फायदे का सौदा है। यह विकल्प खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनका लोन अभी शुरुआती दौर में है।
एक से ज़्यादा लोन हैं तो क्या करें?
अगर आपके ऊपर एक से ज़्यादा लोन चल रहे हैं, जैसे क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन और कार लोन, तो सबसे पहले उस लोन को चुकाने पर ध्यान केंद्रित करें जिसकी ब्याज दर सबसे ज़्यादा हो। आमतौर पर क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन सबसे महंगे होते हैं। इन पर कोई टैक्स लाभ भी नहीं मिलता। इन्हें जल्दी खत्म करने से आप पर से वित्तीय बोझ तेजी से कम होगा। आप चाहें तो अपने सभी छोटे-छोटे और महंगे लोन को चुकाने के लिए एक कम ब्याज वाला बड़ा 'डेट कंसोलिडेशन' लोन लेने पर भी विचार कर सकते हैं। इससे आपको कई ईएमआई की जगह सिर्फ एक ईएमआई चुकानी होगी।












