शोले (1975)
भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक 'शोले' का अंत आज भी दर्शकों को याद है, जहां ठाकुर, गब्बर को पुलिस के हवाले कर देता है। लेकिन यह असली क्लाइमैक्स नहीं था। निर्देशक रमेश सिप्पी ने जो अंत शूट
किया था, वह कहीं ज्यादा हिंसक और ठाकुर के किरदार के गुस्से को सही ठहराने वाला था। असली क्लाइमैक्स में, ठाकुर अपने कीलों वाले जूतों से गब्बर को कुचल-कुचल कर मार डालता है। हालांकि, उस समय देश में इमरजेंसी लगी हुई थी और सेंसर बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताई। उनका मानना था कि एक पूर्व पुलिस अधिकारी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। भारी मन से, सिप्पी को क्लाइमैक्स दोबारा शूट करना पड़ा, जिसमें ठाकुर को गब्बर को मारने से ठीक पहले पुलिस रोक लेती है।
बाजीगर (1993)
शाहरुख खान के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाली इस थ्रिलर फिल्म ने एंटी-हीरो के कॉन्सेप्ट को लोकप्रिय बना दिया। फिल्म के अंत में, अजय शर्मा (शाहरुख) अपनी प्रेमिका प्रिया (काजोल) की बाहों में दम तोड़ देता है। यह एक यादगार और इमोशनल अंत था, लेकिन निर्देशक अब्बास-मस्तान ने पहले कुछ और सोचा था। एक वैकल्पिक अंत यह था कि अजय अपने दुश्मनों को खत्म करने के बाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया जाता है। हालांकि, निर्माताओं और वितरकों को लगा कि एक दुखद अंत दर्शकों पर ज्यादा गहरा प्रभाव डालेगा और अजय के किरदार के बलिदान को सही ठहराएगा। यह फैसला सही साबित हुआ और फिल्म का क्लाइमैक्स बॉलीवुड के सबसे यादगार दृश्यों में से एक बन गया।
पिंक (2016)
यह फिल्म अपने दमदार संदेश और कोर्टरूम ड्रामा के लिए जानी जाती है, जहां तीन लड़कियां अपने सम्मान की लड़ाई जीतती हैं। फिल्म का अंत न्याय और उम्मीद का संदेश देता है, लेकिन मूल रूप से इसका अंत काफी निराशाजनक था। शुरुआती स्क्रिप्ट के अनुसार, लड़कियों को केस हारना था, जो समाज की कड़वी सच्चाई को दर्शाता। हालांकि, निर्माताओं ने महसूस किया कि एक सकारात्मक अंत दर्शकों को प्रेरित करेगा और अधिक महिलाओं को आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसलिए, क्लाइमैक्स को बदलकर एक विजयी अंत में तब्दील कर दिया गया, ताकि फिल्म एक मजबूत सामाजिक संदेश दे सके।
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995)
डीडीएलजे का क्लाइमैक्स, जहां अमरीश पुरी 'जा सिमरन जा' कहते हैं, भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित क्षणों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सीन में एक्शन का तड़का शाहरुख खान के कहने पर डाला गया था? निर्देशक आदित्य चोपड़ा मूल रूप से क्लाइमैक्स में कोई लड़ाई का सीन नहीं चाहते थे। हालांकि, शाहरुख खान ने जोर देकर कहा कि राज और कुलजीत (परमीत सेठी) के बीच एक फाइट सीन होना चाहिए ताकि राज अपने प्यार के लिए लड़ता हुआ दिखे। आदित्य चोपड़ा मान गए और यह सीन फिल्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया, जिसने राज के किरदार को और भी हीरोइक बना दिया। हालांकि यह क्लाइमैक्स का पूरा बदलाव नहीं था, लेकिन इस एक छोटे से बदलाव ने अंत को और भी असरदार बना दिया।
पीके (2014)
आमिर खान की इस ब्लॉकबस्टर फिल्म का अंत दर्शकों को एक प्यारी सी मुस्कान के साथ छोड़ता है, जब पीके एक और एलियन (रणबीर कपूर) के साथ पृथ्वी पर वापस आता है। लेकिन निर्देशक राजकुमार हिरानी ने शुरुआत में एक अलग, ज्यादा भावनात्मक अंत की योजना बनाई थी। मूल योजना के अनुसार, पीके को पृथ्वी पर वापस नहीं आना था। एक और विचाराधीन अंत में जग्गू (अनुष्का शर्मा) और सरफराज (सुशांत सिंह राजपूत) पीके को याद करते हुए 'बैटरी रिचार्ज' डांस करते हुए दिखाए जाने थे। हालांकि, टेस्ट स्क्रीनिंग के दौरान दर्शकों की प्रतिक्रिया को देखते हुए, जिन्होंने पीके की वापसी की इच्छा जताई, निर्माताओं ने एक खुशनुमा अंत जोड़ने का फैसला किया, जिसने फिल्म को एक सीक्वल की संभावना भी दी।













