1950: जब शौकिया खिलाड़ियों ने 'किंग्स ऑफ फुटबॉल' को हराया
1950 में, इंग्लैंड की टीम को 'किंग्स ऑफ फुटबॉल' कहा जाता था और वह विश्व कप जीतने की प्रबल दावेदार थी। दूसरी ओर, अमेरिकी टीम पार्ट-टाइम खिलाड़ियों से बनी थी, जिसमें एक डाकिया, एक डिशवॉशर और एक जनाजा चलाने
वाला ड्राइवर शामिल था। किसी ने भी अमेरिका को कोई मौका नहीं दिया था। मैच ब्राजील के बेलो होरिजोंटे में खेला गया। इंग्लैंड ने शुरुआत से ही हमलावर खेल दिखाया, लेकिन अमेरिकी गोलकीपर फ्रैंक बोरघी चट्टान की तरह खड़े रहे। फिर, खेल के 37वें मिनट में, जो गैटजेंस के एक हेडर ने फुटबॉल की दुनिया को हिलाकर रख दिया। यह गोल एक संयोग जैसा था, लेकिन इसने अमेरिका को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद इंग्लैंड ने वापसी की बहुत कोशिश की, लेकिन अमेरिकी डिफेंस और गोलकीपर ने उन्हें रोककर रखा। जब अंतिम सीटी बजी, तो यह सिर्फ एक मैच का नतीजा नहीं था, बल्कि फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा आश्चर्य था, जिसे आज 'मिरेकल ऑन ग्रास' के नाम से जाना जाता है।
1966: उत्तर कोरिया का वो गोल जिसने इटली को रुला दिया
1966 के विश्व कप में उत्तर कोरिया की टीम एक रहस्य की तरह थी, जिससे किसी को कोई उम्मीद नहीं थी। उनका मुकाबला दो बार की विश्व चैंपियन इटली से था। यह मैच मिडल्सब्रो के आयरसम पार्क में हुआ। इटली की टीम सितारों से सजी थी और उन्हें एक आसान जीत की उम्मीद थी। लेकिन उत्तर कोरिया के खिलाड़ियों ने अपनी गति और दृढ़ संकल्प से सभी को चौंका दिया। मैच का निर्णायक क्षण पहले हाफ के अंत में आया जब पाक डू-इक ने एक शानदार गोल करके उत्तर कोरिया को 1-0 से आगे कर दिया। इस गोल के बाद इटली की टीम दबाव में बिखर गई। उन्हें 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा क्योंकि उनका एक खिलाड़ी घायल हो गया था और उस समय सब्सीट्यूट का नियम नहीं था। उत्तर कोरिया ने इस बढ़त को अंत तक बनाए रखा और फुटबॉल के इतिहास में सबसे सनसनीखेज जीतों में से एक दर्ज की। इस जीत ने न केवल इटली को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया, बल्कि एक गुमनाम टीम को रातों-रात हीरो बना दिया।
1990: जब कैमरून के 'अदम्य शेरों' ने माराडोना को झुकाया
1990 का विश्व कप इटली में हो रहा था और उद्घाटन मैच में डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना का सामना कैमरून से था। अर्जेंटीना की टीम में डिएगो माराडोना जैसा दिग्गज था और वे खिताब के प्रबल दावेदार थे। दूसरी तरफ, कैमरून की टीम के ज्यादातर खिलाड़ी कम प्रसिद्ध थे। किसी ने नहीं सोचा था कि वे अर्जेंटीना को टक्कर दे पाएंगे। लेकिन कैमरून के 'अदम्य शेरों' के इरादे कुछ और ही थे। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक और शारीरिक खेल दिखाया, खासकर माराडोना को खूब परेशान किया। मैच का एकमात्र गोल 67वें मिनट में फ्रांस्वा ओमाम-बिक ने एक हेडर से किया, जिसे अर्जेंटीना के गोलकीपर रोक नहीं पाए। इस हार के झटके के बावजूद, अर्जेंटीना फाइनल तक पहुंचने में कामयाब रहा, लेकिन कैमरून की यह जीत अफ्रीकी फुटबॉल के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गई। इसने दुनिया को दिखाया कि अफ्रीकी टीमें किसी से कम नहीं हैं।
2002: सेनेगल का वो जादू जिसने फ्रांस को किया बेबस
2002 में, विश्व कप का उद्घाटन मैच डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस और पहली बार टूर्नामेंट में खेल रहे सेनेगल के बीच था। फ्रांस की टीम सितारों से सजी थी और उनसे एकतरफा जीत की उम्मीद थी। लेकिन सेनेगल, जो कभी फ्रांस का उपनिवेश था, ने अपने इरादे साफ कर दिए। कई सेनेगल के खिलाड़ी फ्रेंच लीग में खेलते थे, इसलिए वे अपने प्रतिद्वंद्वियों को अच्छी तरह जानते थे। मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल 30वें मिनट में पापा बूबा डियोप ने किया। इस गोल के बाद फ्रांस ने बराबरी के लिए जी-जान लगा दी, लेकिन सेनेगल की रक्षापंक्ति ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया। यह नतीजा इतना बड़ा उलटफेर था कि फ्रांस ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गया, जबकि सेनेगल ने क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। यह मैच इस बात का सबूत था कि फुटबॉल में कभी भी किसी टीम को कम नहीं आंकना चाहिए।
2022: सऊदी अरब की हाई-लाइन जिसने मेसी को चौंकाया
2022 के कतर विश्व कप में अर्जेंटीना अपने पहले ही मैच में सऊदी अरब से 2-1 से हार गया। यह एक ऐसा नतीजा था जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अर्जेंटीना 36 मैचों से अजेय थी और लियोनेल मेसी के नेतृत्व में खिताब की सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही थी। सऊदी अरब के कोच हर्वे रेनार्ड ने एक साहसी रणनीति अपनाई। उन्होंने अपनी डिफेंस लाइन को बहुत ऊंचा रखा, जिसे 'हाई-लाइन' कहा जाता है। इस रणनीति का मकसद अर्जेंटीना के फॉरवर्ड खिलाड़ियों को ऑफसाइड ट्रैप में फंसाना था। यह जोखिम भरा था, लेकिन इसने काम किया। पहले हाफ में अर्जेंटीना के तीन गोल ऑफसाइड होने के कारण रद्द कर दिए गए। दूसरे हाफ में, सऊदी अरब ने जवाबी हमला किया और सिर्फ पांच मिनट के भीतर दो गोल करके दुनिया को हैरान कर दिया। यह जीत सिर्फ किस्मत का खेल नहीं थी, बल्कि यह बेहतरीन रणनीति, अनुशासन और आत्मविश्वास का नतीजा थी।










