शानदार रिटर्न का सच
पिछले कुछ साल भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहतरीन रहे हैं, खासकर कुछ खास सेक्टर्स के लिए। इसी तेजी का फायदा उठाकर कई इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स ने अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया। तीन से पांच साल की अवधि
में 100% से ज्यादा का रिटर्न, यानी पैसा डबल होना, कोई अनोखी बात नहीं रही। इनमें से ज्यादातर फंड्स या तो स्मॉल-कैप, मिड-कैप कैटेगरी के हैं या फिर इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और PSU जैसे थीमैटिक सेक्टर्स में निवेश करते हैं। सरकारी नीतियों, बढ़ते खर्च और मजबूत घरेलू मांग ने इन क्षेत्रों को जबरदस्त बढ़ावा दिया है, जिसका सीधा असर इन फंड्स के प्रदर्शन पर दिखा। हालांकि, यह याद रखना बेहद जरूरी है कि पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता।
1. एचडीएफसी डिफेंस फंड (HDFC Defence Fund)
इस फंड ने पिछले तीन सालों में निवेशकों को चकित करने वाला रिटर्न दिया है, जो करीब 174% रहा।. इसका मतलब है कि तीन साल पहले लगाया गया 1 लाख रुपये आज लगभग 2.74 लाख रुपये बन गया होता। इस फंड की सफलता का राज सरकार का रक्षा क्षेत्र पर बढ़ता फोकस और 'मेक इन इंडिया' पहल है। यह फंड मुख्य रूप से रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में निवेश करता है। इस सेक्टर को सरकार से लगातार बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे कंपनियों की कमाई में जोरदार उछाल आया है। हालांकि, यह एक सेक्टर-विशिष्ट फंड है, इसलिए इसमें जोखिम भी अधिक है। अगर इस सेक्टर की गति धीमी पड़ती है, तो फंड का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
2. बंधन स्मॉल-कैप फंड (Bandhan Small Cap Fund)
स्मॉल-कैप कैटेगरी हमेशा से ही हाई-रिस्क, हाई-रिटर्न वाली रही है। बंधन स्मॉल-कैप फंड ने इस बात को सही साबित करते हुए पिछले तीन साल में करीब 106% का रिटर्न दिया है। यह फंड छोटी कंपनियों में निवेश करता है जिनमें भविष्य में बड़ी बनने की क्षमता होती है। 2026 की पहली छमाही में भी स्मॉल-कैप फंड्स का प्रदर्शन शानदार रहा है, जबकि बाजार में कई चुनौतियां थीं। हालांकि, निवेशकों को यह समझना चाहिए कि स्मॉल-कैप स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा होता है। बाजार में गिरावट आने पर इन पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है।
3. क्वांट बीएफएसआई फंड (Quant BFSI Fund)
यह एक और थीमैटिक फंड है, जो बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर पर फोकस करता है। पिछले तीन वर्षों में इसने लगभग 101% का रिटर्न देकर निवेशकों का पैसा दोगुना किया है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती आय और लोन की बढ़ती मांग ने इस सेक्टर को मजबूती दी है। यह फंड इसी ग्रोथ का फायदा उठाता है। थीमैटिक फंड होने के नाते, इसका प्रदर्शन पूरी तरह से BFSI सेक्टर के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। ब्याज दरों में बदलाव या कोई रेगुलेटरी सख्ती इसके रिटर्न को प्रभावित कर सकती है।
4. एलआईसी एमएफ इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (LIC MF Infrastructure Fund)
इंफ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचा, सरकार के सबसे पसंदीदा सेक्टर्स में से एक है। नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन जैसी योजनाओं पर भारी सरकारी खर्च का सीधा फायदा इस सेक्टर की कंपनियों को मिला है। इसी लहर पर सवार होकर एलआईसी एमएफ इंफ्रास्ट्रक्चर फंड ने पिछले तीन साल में करीब 100% का रिटर्न दिया है। इस फंड ने भी 5 साल की अवधि में करीब 183% का दमदार रिटर्न दिया है। भविष्य में भी इस सेक्टर से काफी उम्मीदें हैं, लेकिन यह सरकारी नीतियों और आर्थिक गति पर बहुत अधिक निर्भर है।
5. एसबीआई पीएसयू फंड (SBI PSU Fund)
पिछले कुछ सालों में सरकारी कंपनियों (PSUs) ने बाजार में शानदार वापसी की है। एसबीआई पीएसयू फंड ने इसी मौके को भुनाते हुए दमदार प्रदर्शन किया है। हालांकि इसका तीन साल का रिटर्न 100% से थोड़ा कम (लगभग 99%) रहा, लेकिन पांच साल की अवधि में इसने 183% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। यह फंड मुख्य रूप से सरकारी कंपनियों में निवेश करता है। इन कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार और सरकार के विनिवेश पर फोकस ने निवेशकों का भरोसा जीता है। पीएसयू स्टॉक्स का प्रदर्शन अक्सर सरकारी नीतियों और फैसलों से प्रभावित होता है, जो एक तरह का जोखिम है।
तो, क्या अब भी मिलेगा बंपर रिटर्न?
यह मिलियन-डॉलर का सवाल है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन थीम (डिफेंस, इंफ्रा, पीएसयू) ने पिछले कुछ साल में अच्छा प्रदर्शन किया है, उनमें आगे भी ग्रोथ की संभावनाएं हैं। सरकार का फोकस इन सेक्टर्स पर बना हुआ है और कंपनियों की कमाई भी मजबूत है। हालांकि, यह उम्मीद करना कि रिटर्न हर साल डबल होता रहेगा, सही नहीं है। बाजार हमेशा एक जैसा नहीं रहता। स्मॉल और मिड-कैप फंड्स में हालिया गिरावट के बाद अब वैल्यूएशन कुछ आकर्षक दिख रहे हैं, लेकिन अस्थिरता का खतरा बना हुआ है। निवेशकों को सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर पैसा नहीं लगाना चाहिए। किसी भी फंड में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश की अवधि पर विचार करना महत्वपूर्ण है।













