सिडनी टेस्ट और विवाद की शुरुआत
साल 2008, भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा। सिडनी में खेला जा रहा बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का दूसरा टेस्ट मैच पहले से ही खराब अंपायरिंग के कारण तनावपूर्ण था। मैच के तीसरे दिन, जब सचिन तेंदुलकर और हरभजन सिंह बल्लेबाजी
कर रहे थे, तब ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर एंड्रयू साइमंड्स और हरभजन के बीच कहासुनी हुई। साइमंड्स ने आरोप लगाया कि हरभजन ने उन्हें नस्लीय टिप्पणी करते हुए 'बंदर' (मंकी) कहा। यह आरोप इसलिए भी गंभीर था क्योंकि साइमंड्स कैरिबियाई मूल के थे और इसे नस्लीय अपमान माना गया। हरभजन ने हमेशा इस आरोप से इनकार किया और कहा कि उन्होंने पंजाबी में कुछ कहा था, जिसे गलत समझा गया।
मैच रेफरी का कड़ा फैसला और भारत का कड़ा रुख
मैच के बाद, ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान रिकी पोंटिंग ने मैच रेफरी माइक प्रॉक्टर से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। प्रॉक्टर ने सुनवाई के बाद हरभजन सिंह को नस्लीय टिप्पणी का दोषी पाया और उन पर तीन टेस्ट मैचों का प्रतिबंध लगा दिया। इस फैसले से भारतीय खेमे में भारी नाराजगी फैली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इस फैसले को एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताया। टीम इंडिया ने दौरे का बहिष्कार करने और बाकी मैच खेले बिना स्वदेश लौटने की धमकी दे दी, जिससे दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड आमने-सामने आ गए।
सचिन की गवाही और फैसले का पलटना
बीसीसीआई ने इस प्रतिबंध के खिलाफ आईसीसी में अपील की। इस मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब उस समय क्रीज पर मौजूद सचिन तेंदुलकर ने गवाही दी। सचिन ने बताया कि उन्होंने हरभजन को साइमंड्स के लिए नस्लीय टिप्पणी करते हुए नहीं सुना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरभजन ने जो कहा वह 'तेरी मां की' जैसा कुछ था, जिसे साइमंड्स ने गलत समझ लिया। इस गवाही के बाद, अपील की सुनवाई कर रहे न्यूजीलैंड के जज जॉन हैनसेन ने हरभजन पर लगे नस्लीय दुर्व्यवहार के आरोप को हटा दिया। हालांकि, उन्हें अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का दोषी पाया गया और उन पर मैच फीस का 50% जुर्माना लगाया गया, जिससे तीन मैचों का प्रतिबंध हट गया और दौरा बच गया।
विवाद का असर और विरासत
'मंकीगेट' कांड का असर दोनों खिलाड़ियों पर गहरा पड़ा। साइमंड्स ने बाद में खुलासा किया कि इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था और वह शराब की ओर धकेल दिए गए थे, जिससे उनका करियर ढलान पर चला गया। यह विवाद सिर्फ मैदान तक ही सीमित नहीं रहा, इसने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट की प्रतिद्वंद्विता को और भी तीखा बना दिया। इस घटना के बाद आईसीसी ने खिलाड़ी आचार संहिता और नस्लवाद से जुड़े नियमों को और भी सख्त कर दिया। इस विवाद ने मैदान पर होने वाली स्लेजिंग और नस्लीय टिप्पणी के बीच की महीन रेखा को दुनिया के सामने उजागर कर दिया।
दुश्मनी से दोस्ती तक का सफर
कहते हैं वक्त हर घाव भर देता है। जो खिलाड़ी मैदान पर एक-दूसरे के जानी-दुश्मन बन गए थे, उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने एक साथ ला खड़ा किया। साल 2011 में हरभजन और साइमंड्स दोनों मुंबई इंडियंस टीम का हिस्सा बने। शुरुआत में दोनों के बीच झिझक थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपने मतभेद भुला दिए। हरभजन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे एक पार्टी में उन्होंने और साइमंड्स ने एक-दूसरे से माफी मांगी और गले मिले। इस तरह क्रिकेट के सबसे बड़े विवादों में से एक का अंत दोस्ती पर हुआ, जो इस खेल की सच्ची भावना को दर्शाता है।














