व्यक्तिगत जानकारी का मिलान सबसे पहले करें
आईटीआर फाइलिंग में सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है अपनी व्यक्तिगत जानकारी को जांचना। यह सुनिश्चित करें कि आपका नाम, पता, और सबसे जरूरी आपका पैन नंबर (PAN) सैलरी स्लिप और फॉर्म 16 दोनों में बिल्कुल एक जैसा
हो। अगर पैन नंबर गलत है, तो आपके द्वारा काटा गया टैक्स (TDS) आपके खाते में जमा नहीं होगा और आपको टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसी तरह, आपके नियोक्ता का नाम और टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर (TAN) भी सही-सही दर्ज होना चाहिए। किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर तुरंत अपने एचआर या अकाउंट्स विभाग से संपर्क करके इसे ठीक करवाएं।
कुल सैलरी (Gross Salary) और भत्तों की जांच
फॉर्म 16 के पार्ट बी और अपनी मासिक सैलरी स्लिप को साथ रखकर कुल सैलरी का मिलान करें। देखें कि आपकी बेसिक सैलरी, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) और अन्य स्पेशल अलाउंस दोनों दस्तावेज़ों में समान हैं या नहीं। कई बार सैलरी स्लिप में कुछ भत्ते शामिल होते हैं, लेकिन नियोक्ता उन्हें फॉर्म 16 में दिखाना भूल जाता है। यह भी जांचें कि सेक्शन 10 के तहत मिलने वाली छूट, जैसे एचआरए और एलटीए, फॉर्म 16 में सही ढंग से दिखाई गई हैं या नहीं। अगर इन आंकड़ों में कोई अंतर है, तो आपकी कर योग्य आय (Taxable Income) की गणना गलत हो सकती है, जिससे भविष्य में परेशानी हो सकती है।
कटौतियों (Deductions) का सत्यापन है जरूरी
अगर आपने पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनी है, तो यह कदम आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आपने साल की शुरुआत में टैक्स बचाने के लिए जो निवेश घोषित किए थे, जैसे कि सेक्शन 80C (PPF, LIC, ELSS), 80D (स्वास्थ्य बीमा), और 80CCD (NPS), उनकी जांच करें। सुनिश्चित करें कि इन सभी कटौतियों का उल्लेख फॉर्म 16 के पार्ट बी में किया गया है। अगर आपने निवेश के प्रमाण समय पर जमा किए हैं, लेकिन वे फॉर्म 16 में नहीं दिख रहे हैं, तो भी आप आईटीआर फाइल करते समय इन कटौतियों का दावा कर सकते हैं। बस आपके पास उन निवेशों के वैध प्रमाण होने चाहिए।
TDS कटौती का मिलान: सबसे महत्वपूर्ण जांच
यह सबसे आम क्षेत्र है जहां गलतियां होती हैं। आपकी हर महीने की सैलरी स्लिप में काटे गए TDS को जोड़कर कुल राशि निकालें। अब इस राशि का मिलान फॉर्म 16 के पार्ट A में दिए गए TDS के आंकड़े से करें। इसके बाद, इन दोनों का मिलान फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) से करना अनिवार्य है। फॉर्म 26AS आयकर विभाग का रिकॉर्ड है कि आपके पैन पर कितना टैक्स जमा हुआ है। अगर आपकी सैलरी स्लिप/फॉर्म 16 और फॉर्म 26AS में TDS की राशि में अंतर है, तो आयकर विभाग 26AS के आंकड़े को ही सही मानेगा। ऐसी स्थिति में तुरंत अपने नियोक्ता से संपर्क करें ताकि वे संशोधित TDS रिटर्न फाइल कर सकें।
नौकरी बदली है तो बरतें अतिरिक्त सावधानी
अगर आपने एक वित्तीय वर्ष के दौरान नौकरी बदली है, तो आपको अपने दोनों नियोक्ताओं से फॉर्म 16 लेना होगा। इस स्थिति में गलती की संभावना बढ़ जाती है। अक्सर दोनों नियोक्ता अलग-अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन और सेक्शन 80C जैसी कटौतियों का लाभ दे देते हैं, जबकि यह छूट आपको साल में केवल एक बार ही मिल सकती है। आपको दोनों फॉर्म 16 की आय को जोड़कर अपनी कुल आय पर टैक्स की गणना करनी होगी। हो सकता है कि दोनों आय को मिलाकर आप ऊंचे टैक्स स्लैब में आ जाएं, जिससे आपकी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। इसलिए दोनों फॉर्म 16 की जानकारी को सावधानी से जोड़कर ही अपना आईटीआर फाइल करें।














