पहला कदम: बोली प्रक्रिया की शुरुआत
सब कुछ फीफा द्वारा आधिकारिक तौर पर बोली प्रक्रिया शुरू करने के साथ होता है। फीफा अपने 211 सदस्य संघों को विश्व कप की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी (बिड) पेश करने के लिए आमंत्रित करता है। हालांकि, इसमें
एक रोटेशन पॉलिसी भी काम करती है। आम तौर पर, जिन महाद्वीपों ने पिछले दो विश्व कप की मेजबानी की है, वे अगले संस्करण के लिए बोली नहीं लगा सकते। उदाहरण के लिए, 2022 में एशिया (कतर) और 2026 में उत्तरी अमेरिका (कनाडा, मैक्सिको, यूएसए) में आयोजन के कारण, इन महाद्वीपों के देश 2030 की मेजबानी की दौड़ से बाहर थे। इच्छुक देश अकेले या संयुक्त रूप से भी बोली लगा सकते हैं, जैसा कि 2026 और 2030 के लिए हुआ है।
फीफा क्या ढूंढता है? मेजबानी की प्रमुख आवश्यकताएं
बोली लगाने वाले देशों को फीफा द्वारा निर्धारित कड़े मानदंडों पर खरा उतरना होता है। यह सिर्फ फुटबॉल के बारे में नहीं है, बल्कि एक विशाल अंतरराष्ट्रीय आयोजन के प्रबंधन की क्षमता का प्रदर्शन है। मुख्य आवश्यकताओं में शामिल हैं: स्टेडियम: मेजबान देश के पास कम से-कम 14 अत्याधुनिक स्टेडियम होने चाहिए। इनमें शुरुआती मैच और फाइनल के लिए 80,000 की क्षमता वाला और सेमीफाइनल के लिए 60,000 की क्षमता वाला स्टेडियम होना अनिवार्य है। बुनियादी ढांचा: इसमें एयरपोर्ट, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सड़कों का नेटवर्क और विश्व भर से आने वाले लाखों प्रशंसकों, टीमों और अधिकारियों के लिए पर्याप्त संख्या में होटल शामिल हैं। सरकारी समर्थन: बोली लगाने वाले देशों की सरकार को सुरक्षा, वीजा और टैक्स जैसे मामलों पर पूरी गारंटी देनी होती है। मानवाधिकार और स्थिरता: 2018 और 2022 के मेजबानों को लेकर हुए विवादों के बाद, फीफा ने अब मानवाधिकारों और पर्यावरण संरक्षण पर बहुत जोर देना शुरू कर दिया है। बोली लगाने वालों को अपनी मानवाधिकार रणनीति भी पेश करनी होती है।
मूल्यांकन का दौर: निरीक्षण और रिपोर्ट
एक बार जब देश अपनी विस्तृत बोली पुस्तिका (बिड बुक) जमा कर देते हैं, तो फीफा की एक 'बिड इवैल्यूएशन टास्क फोर्स' काम पर लग जाती है। यह टीम बोली लगाने वाले प्रत्येक देश का दौरा करती है। वे स्टेडियमों, प्रशिक्षण सुविधाओं, होटलों और परिवहन व्यवस्था का निरीक्षण करते हैं। इस निरीक्षण के आधार पर, टास्क फोर्स एक विस्तृत तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करती है, जिसमें प्रत्येक बोली के मजबूत और कमजोर पहलुओं का विश्लेषण होता है। इस रिपोर्ट में जोखिम का आकलन भी किया जाता है, जैसे कि निर्माण में देरी या अपर्याप्त बुनियादी ढांचा।
अंतिम फैसला: कौन करता है मतदान?
पहले मेजबान का फैसला फीफा की एक छोटी कार्यकारी समिति करती थी, जिसमें केवल 24 सदस्य होते थे। लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद इस प्रक्रिया में एक बड़ा सुधार किया गया। अब, अंतिम फैसला फीफा कांग्रेस में होता है, जहां सभी 211 सदस्य संघों को एक-एक वोट देने का अधिकार है। फीफा परिषद मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर अंतिम उम्मीदवारों (अधिकतम तीन) को कांग्रेस के सामने पेश करती है। जिस बोली को पूर्ण बहुमत (50% + 1) मिलता है, उसे मेजबानी का अधिकार सौंप दिया जाता है। यह वोटिंग प्रक्रिया अब सार्वजनिक होती है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
आने वाले विश्व कप: प्रक्रिया का परिणाम
इस प्रक्रिया के हालिया उदाहरण भविष्य के टूर्नामेंटों में देखे जा सकते हैं। 2026 का विश्व कप कनाडा, मैक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका की संयुक्त मेजबानी में होगा, जिसमें पहली बार 48 टीमें हिस्सा लेंगी। 2030 का संस्करण और भी अनूठा होगा; इसकी मुख्य मेजबानी मोरक्को, पुर्तगाल और स्पेन करेंगे, जबकि टूर्नामेंट की 100वीं वर्षगांठ मनाने के लिए शुरुआती तीन मैच दक्षिण अमेरिकी देशों- उरुग्वे, अर्जेंटीना और पैराग्वे में खेले जाएंगे। वहीं, 2034 विश्व कप की मेजबानी का जिम्मा सऊदी अरब को सौंपा गया है।










