आंद्रे क्यूबास (पैराग्वे) - मिडफील्ड का पावरहाउस
जब पैराग्वे ने फ्रांस जैसी मजबूत टीम को लगभग रोक ही दिया था, तो उसके पीछे उनके मिडफील्डर आंद्रे क्यूबास का अथक परिश्रम था। क्यूबास ने पूरे टूर्नामेंट में एक डिफेंसिव मिडफील्डर की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित
किया। उन्होंने सबसे ज्यादा टैकल किए और विपक्षी टीम के हमलों को बार-बार नाकाम किया। गेंद पर उनकी पकड़ और खेल को पढ़ने की क्षमता अद्वितीय थी, लेकिन क्योंकि पैराग्वे आगे नहीं बढ़ पाया, उनके इस शानदार प्रदर्शन पर ज्यादा लोगों का ध्यान नहीं गया। वह चुपचाप अपना काम करते रहे और टीम के लिए एक चट्टान की तरह खड़े रहे।
योएन विसा (डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) - उम्मीदों का दूसरा नाम
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के लिए यह विश्व कप ऐतिहासिक था और इसके केंद्र में फॉरवर्ड योएन विसा थे। हालांकि उनकी टीम नॉकआउट से बाहर हो गई, लेकिन विसा ने अपनी गति और गोल करने की क्षमता से सबको प्रभावित किया। उन्होंने ग्रुप स्टेज के महत्वपूर्ण मैचों में गोल करके टीम को अंक दिलाए। बड़े नामों वाली टीमों के खिलाफ भी उनका प्रदर्शन देखने लायक था। विसा जैसे खिलाड़ी यह साबित करते हैं कि विश्व कप सिर्फ बड़े देशों के स्टार्स का ही मंच नहीं है, बल्कि यह उभरती हुई प्रतिभाओं के लिए भी एक अवसर है।
स्टीफन यूस्टाकियो (कनाडा) - सिर्फ एक गोल से कहीं ज्यादा
कनाडा के फुटबॉल इतिहास में स्टीफन यूस्टाकियो का नाम हमेशा याद रखा जाएगा, खासकर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 92वें मिनट में किए गए उस गोल के लिए जिसने कनाडा को पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचाया। लेकिन उनका योगदान सिर्फ उस एक गोल तक सीमित नहीं था। पूरे टूर्नामेंट में वह कनाडा की मिडफील्ड के दिल थे। उन्होंने सबसे ज्यादा दूरी तय की, सबसे ज्यादा क्रॉस दिए और टीम के हर हमले की नींव रखी। उनका वर्क-रेट और खेल के प्रति समर्पण उन्हें इस सूची में एक स्वाभाविक पसंद बनाता है।
वोज्निया (काबो वर्डे) - गोलपोस्ट का अजेय प्रहरी
अगर इस विश्व कप में किसी गोलकीपर ने अपनी टीम के लिए उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया, तो वह काबो वर्डे के वोज्निया थे। अपने देश को पहली बार नॉकआउट चरण तक ले जाने में उनकी भूमिका सबसे अहम थी। उन्होंने ग्रुप स्टेज में स्पेन और अर्जेंटीना जैसी टीमों के खिलाफ शानदार बचाव किए। एक यूट्यूबर ने विश्लेषण किया कि टूर्नामेंट से बाहर होने तक वोज्निया का सेव प्रतिशत लगभग 78% था, जो शीर्ष गोलकीपरों में से एक था। उनकी टीम भले ही आगे नहीं बढ़ पाई, लेकिन वोज्निया ने दुनिया को दिखा दिया कि छोटे देशों में भी विश्व स्तरीय प्रतिभा मौजूद है।
जूलियन क्विनोन्स (मेक्सिको) - एक नई पहचान
मेक्सिको के लिए जूलियन क्विनोन्स इस टूर्नामेंट की खोज रहे। कोलंबिया में जन्मे इस खिलाड़ी ने मेक्सिको का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने न केवल महत्वपूर्ण गोल किए, बल्कि उनकी आक्रामक शैली और ऊर्जा ने टीम में एक नई जान फूंकी। क्विनोन्स की कहानी भी काफी दिलचस्प है, जो कोलंबिया से आकर मेक्सिको के नागरिक बने और फिर देश के लिए विश्व कप में स्टार बन गए। वह उन खिलाड़ियों में से एक थे जिनके बारे में टूर्नामेंट से पहले कम ही लोग जानते थे, लेकिन अब उनकी एक अलग पहचान है।










