इमरजेंसी फंड आखिर है क्या?
इमरजेंसी फंड एक अलग रखा हुआ पैसा है जिसे सिर्फ और सिर्फ अप्रत्याशित वित्तीय संकटों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह आपकी छुट्टियों या नए फोन के लिए की गई बचत नहीं है, और न ही यह आपका निवेश है। इसे एक ऐसी
जमा-पूंजी समझें जिसका एकमात्र उद्देश्य मुश्किल समय में आपके जरूरी खर्चों, जैसे घर का किराया, ईएमआई, स्कूल की फीस और राशन-पानी का इंतजाम करना है, जब आपकी नियमित आय का स्रोत बंद हो जाए। एक मजबूत इमरजेंसी फंड होने का मतलब है कि आपको किसी संकट के समय में अपने लंबी अवधि के निवेश, जैसे कि म्यूचुअल फंड एसआईपी या प्रॉपर्टी, को नुकसान में बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आपका इमरजेंसी फंड कितना बड़ा होना चाहिए?
इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है, क्योंकि यह आपकी जीवनशैली, आय और जिम्मेदारियों पर निर्भर करता है। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञ एक सामान्य नियम बताते हैं: आपके पास कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर का फंड होना चाहिए। इसका मतलब है कि अगर आपका महीने का अनिवार्य खर्च 40,000 रुपये है, तो आपका इमरजेंसी फंड 1,20,000 रुपये से 2,40,000 रुपये के बीच होना चाहिए। इस गणना में सिर्फ वही खर्च शामिल करें जो जिंदा रहने के लिए आवश्यक हैं, जैसे कि किराया या ईएमआई, खाना, बिजली-पानी के बिल, और बीमा प्रीमियम। इसमें मनोरंजन, शॉपिंग या बाहर खाने जैसे खर्चे शामिल नहीं होते।
फंड का आकार तय करने वाले कारक
3 से 6 महीने का नियम एक शुरुआत है, लेकिन आपको अपनी स्थिति के अनुसार इसेปรับ करना चाहिए। यदि आप एक नौकरीपेशा व्यक्ति हैं और घर में कमाने वाले दो लोग हैं, तो 3-4 महीने का फंड पर्याप्त हो सकता है। लेकिन, यदि आप घर में अकेले कमाने वाले हैं, या आपकी आय अनियमित है, जैसे कि फ्रीलांसर या व्यवसायी, तो आपको 9 से 12 महीने के खर्च के बराबर का फंड बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि आय में अस्थिरता का मतलब है कि आपको एक बड़ा सुरक्षा कवच चाहिए। इसी तरह, यदि आप पर आश्रितों की संख्या अधिक है या आपकी नौकरी ऐसे उद्योग में है जहां छंटनी का खतरा ज्यादा रहता है (जैसे स्टार्टअप), तो भी आपको एक बड़ा फंड रखना चाहिए।
इमरजेंसी फंड कहाँ रखें: तीन महत्वपूर्ण नियम
पैसे कहाँ रखें, यह तय करते समय तीन बातों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है: सुरक्षा, लिक्विडिटी (आसानी से उपलब्ध होना), और रिटर्न। इमरजेंसी फंड के मामले में, रिटर्न से ज्यादा महत्वपूर्ण सुरक्षा और लिक्विडिटी है। आपका पैसा ऐसी जगह होना चाहिए जहां वह सुरक्षित रहे और जरूरत पड़ने पर 24 से 48 घंटों के अंदर आपको मिल जाए। इसे कभी भी स्टॉक मार्केट जैसी अस्थिर जगहों पर न लगाएं, क्योंकि बाजार गिरने पर आपको नुकसान में पैसा निकालना पड़ सकता है। पूरा पैसा घर पर नकद रखना भी सही नहीं है, क्योंकि यह चोरी हो सकता है और महंगाई के कारण इसकी कीमत भी कम होती जाती है।
पैसे रखने के बेहतरीन विकल्प
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पूरे फंड को एक जगह रखने के बजाय इसे बांटकर रखें। आप इस तरह की रणनीति अपना सकते हैं: 1. हाई-यील्ड सेविंग्स अकाउंट: अपने फंड का एक छोटा हिस्सा (लगभग 1 महीने के खर्च के बराबर) एक ऐसे सेविंग्स अकाउंट में रखें जहां से आप तुरंत पैसा निकाल सकें। कुछ बैंक सामान्य बचत खातों से थोड़ा बेहतर ब्याज देते हैं। 2. फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): फंड का एक बड़ा हिस्सा आप छोटी-छोटी एफडी में बांटकर रख सकते हैं। स्वीप-इन एफडी एक अच्छा विकल्प है, जिसमें आपके सेविंग्स अकाउंट में एक निश्चित सीमा से अधिक पैसा होने पर वह अपने आप एफडी में बदल जाता है। 3. लिक्विड म्यूचुअल फंड: यह भी एक लोकप्रिय विकल्प है, खासकर बड़े फंड के लिए। लिक्विड फंड बहुत कम अवधि के लिए सुरक्षित साधनों में निवेश करते हैं। इनमें आमतौर पर एफडी के बराबर या थोड़ा बेहतर रिटर्न मिलता है और आप एक या दो दिन में पैसा निकाल सकते हैं। जो लोग ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, उनके लिए यह टैक्स के लिहाज से भी फायदेमंद हो सकता है।
बचने के लिए आम गलतियाँ
इमरजेंसी फंड बनाते समय कुछ सामान्य गलतियों से बचना जरूरी है। सबसे बड़ी गलती है इसे बनाना ही नहीं या इसे टालते रहना। दूसरी गलती, इस फंड को निवेश समझकर इससे ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करना। याद रखें, इसका पहला काम सुरक्षा देना है, कमाई करना नहीं। तीसरी गलती, इस फंड का इस्तेमाल गैर-जरूरी कामों जैसे छुट्टियों या गैजेट्स खरीदने के लिए करना। और अंत में, एक बार फंड बनाने के बाद उसे भूल जाना। अपनी बढ़ती आय और महंगाई के हिसाब से हर साल या दो साल में अपने फंड के लक्ष्य की समीक्षा करें और उसे बढ़ाएं।















