यह झुनझुनी आखिर है क्या?
चिकित्सीय भाषा में इस अहसास को 'पैरेस्थेसिया' कहा जाता है। यह आमतौर पर तब होता है जब किसी नस पर अस्थायी रूप से दबाव पड़ता है, जिससे उस हिस्से में रक्त का संचार और तंत्रिका के संकेत बाधित हो जाते हैं। जैसे,
गलत तरीके से बैठने या सोने के कारण पैर का 'सो जाना' इसी का एक उदाहरण है। जब दबाव हटता है, तो नसें फिर से सक्रिय हो जाती हैं और झुनझुनी महसूस होती है। हालांकि, जब यह बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार होता है, तो यह किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
विटामिन की कमी: एक प्रमुख कारण
स्वस्थ नसों के लिए विटामिन, खासकर विटामिन बी12, बी1 और बी6, बेहद ज़रूरी हैं। विटामिन बी12 की कमी पेरिफेरल न्यूरोपैथी (तंत्रिका क्षति) के सबसे आम कारणों में से एक है। यह विटामिन नसों की सुरक्षा करने वाली परत (माइलिन शीथ) को बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे पैरों और हाथों में झुनझुनी, सुन्नपन और संतुलन में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। शाकाहारी लोगों में इसकी कमी का खतरा अधिक होता है, क्योंकि यह मुख्य रूप से मांसाहारी खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।
डायबिटीज और नसों का संबंध
लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा रहना नसों के लिए ज़हर की तरह काम कर सकता है। इस स्थिति को 'डायबिटिक न्यूरोपैथी' कहा जाता है। हाई ब्लड शुगर उन छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है जो नसों को पोषण देती हैं। इसके कारण नसें ठीक से काम नहीं कर पातीं, जिससे पैरों में झुनझुनी, जलन, दर्द या सुन्नपन महसूस होता है। अक्सर यह लक्षण पैरों से शुरू होकर धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ते हैं। डायबिटीज के मरीज़ों के लिए झुनझुनी एक चेतावनी का संकेत है कि उनके शुगर का स्तर नियंत्रित नहीं है।
नसों पर दबाव या क्षति
कभी-कभी समस्या शरीर के किसी और हिस्से में होती है, लेकिन उसका असर पैरों पर दिखता है। उदाहरण के लिए, रीढ़ की हड्डी में स्लिप डिस्क या साइटिका होने पर नस दब जाती है, जिससे दर्द और झुनझुनी कमर से होते हुए पैरों तक जाती है। इसी तरह, टखने में 'टार्सल टनल सिंड्रोम' होने पर भी नस पर दबाव पड़ता है, जिससे पैर में झुनझुनी होती है। बहुत ज़्यादा टाइट जूते पहनना या लंबे समय तक एक ही जगह खड़े रहना भी अस्थायी रूप से नसों पर दबाव डाल सकता है।
अन्य संभावित स्वास्थ्य स्थितियाँ
पैरों में लगातार झुनझुनी कुछ अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी लक्षण हो सकती है। किडनी की बीमारी होने पर शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा हो सकते हैं, जो नसों को नुकसान पहुँचाते हैं। थायरॉइड की समस्या, विशेष रूप से हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायरॉइड), शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे नसों पर असर पड़ता है। कुछ ऑटोइम्यून रोग जैसे रूमेटाइड आर्थराइटिस या ल्यूपस में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही नसों पर हमला करने लगता है, जिससे झुनझुनी और सुन्नपन होता है। इसके अलावा, कुछ दवाएं (जैसे कीमोथेरेपी) और शराब का अत्यधिक सेवन भी तंत्रिका क्षति का कारण बन सकता है।
डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
अगर झुनझुनी कभी-कभार होती है और स्थिति बदलने पर ठीक हो जाती है, तो चिंता की बात नहीं है। लेकिन अगर यह लगातार बनी रहती है, समय के साथ बढ़ रही है, या इसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। यदि झुनझुनी के साथ कमजोरी, चलने में संतुलन बनाने में कठिनाई, या शरीर के एक तरफ सुन्नपन जैसे लक्षण महसूस हों, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि यह स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।













