आखिर क्या है यह फंड ओवरलैप?
फंड ओवरलैप एक ऐसी स्थिति है जब आपके पोर्टफोलियो में मौजूद दो या दो से अधिक म्यूचुअल फंड स्कीमें एक ही तरह के स्टॉक्स या सिक्योरिटीज में निवेश करती हैं। आसान शब्दों में, आपने सोचा कि आपने अपना पैसा अलग-अलग
फंडों में लगाकर जोखिम कम कर लिया है, लेकिन असल में आपके दोनों फंड एक ही कंपनी के शेयर खरीद रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे आप दो अलग-अलग रेस्टोरेंट से कॉम्बो मील ऑर्डर करें और दोनों में बर्गर और फ्राइज़ एक ही निकलें। आपने वैरायटी चाही थी, पर मिली नहीं। कई निवेशक यह गलती अनजाने में करते हैं, खासकर जब वे एक ही कैटेगरी के कई फंड्स, जैसे कई लार्ज-कैप फंड्स, खरीद लेते हैं।
ओवरलैप से आपके पोर्टफोलियो को क्या नुकसान है?
फंड ओवरलैप की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह डाइवर्सिफिकेशन के फायदे को खत्म कर देता है। जब आपके कई फंड्स एक ही स्टॉक या सेक्टर में भारी निवेश करते हैं, तो आपका जोखिम कम होने के बजाय एक ही जगह केंद्रित हो जाता है। अगर वे कॉमन स्टॉक्स या सेक्टर खराब प्रदर्शन करते हैं, तो आपके पूरे पोर्टफोलियो पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपके दो अलग-अलग फंड्स ने टेक्नोलॉजी सेक्टर के कुछ गिने-चुने स्टॉक्स में ही बड़ा निवेश किया है। अगर किसी वजह से टेक्नोलॉजी सेक्टर में गिरावट आती है, तो आपका पोर्टफोलियो उम्मीद से कहीं ज्यादा गिर सकता है, क्योंकि आपका तथाकथित 'डाइवर्सिफाइड' पोर्टफोलियो असल में कुछ ही कंपनियों पर बहुत ज्यादा निर्भर था। इसके अलावा, आप एक ही तरह के निवेश के लिए दो अलग-अलग फंड्स को मैनेजमेंट फीस भी दे रहे होते हैं, जो एक तरह से अनावश्यक खर्च है।
कैसे पता करें कि आपके फंड्स ओवरलैप हो रहे हैं?
अपने पोर्टफोलियो में ओवरलैप का पता लगाने के दो मुख्य तरीके हैं। पहला, आप मैनुअली अपने सभी फंड्स की फैक्टशीट या मासिक पोर्टफोलियो रिपोर्ट देखकर उनके टॉप होल्डिंग्स की तुलना कर सकते हैं। अगर आपको कई फंड्स में एक जैसे नाम दिखते हैं, तो समझ जाइए कि ओवरलैप है। दूसरा और ज्यादा आसान तरीका है ऑनलाइन पोर्टफोलियो ओवरलैप टूल का इस्तेमाल करना। कई फाइनेंशियल वेबसाइट्स यह सुविधा मुफ्त में देती हैं। आपको बस अपने म्यूचुअल फंड्स के नाम डालने होते हैं और ये टूल आपको बता देंगे कि आपके फंड्स के बीच कितने प्रतिशत का ओवरलैप है।
कितना ओवरलैप सामान्य है?
यह समझना जरूरी है कि थोड़ा-बहुत ओवरलैप होना स्वाभाविक है, खासकर एक ही कैटेगरी के फंड्स में। उदाहरण के तौर पर, ज्यादातर लार्ज-कैप फंड्स देश की शीर्ष 100 बड़ी कंपनियों में ही निवेश करते हैं, इसलिए उनमें कुछ कॉमन स्टॉक्स होना लाजिमी है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 20-30% तक का ओवरलैप चिंता का विषय नहीं है। लेकिन अगर यह प्रतिशत इससे ज्यादा है, तो आपको अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने की जरूरत है। 60% से अधिक का ओवरलैप यह संकेत देता है कि आपके फंड्स में कोई खास अंतर नहीं है और डाइवर्सिफिकेशन का फायदा बहुत कम हो गया है।
ओवरलैप की समस्या को कैसे दूर करें?
अगर आपके पोर्टफोलियो में बहुत ज्यादा ओवरलैप है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहला कदम है अपने पोर्टफोलियो की नियमित रूप से समीक्षा करना। उन फंड्स की पहचान करें जिनमें सबसे ज्यादा ओवरलैप है। आप उनमें से किसी एक फंड को बेचकर उस पैसे को किसी ऐसे फंड में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं जिसकी निवेश रणनीति और होल्डिंग्स बिल्कुल अलग हों। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास दो लार्ज-कैप ग्रोथ फंड हैं, तो आप एक को बेचकर उसकी जगह एक वैल्यू-ओरिएंटेड फंड या मिड-कैप/स्मॉल-कैप फंड में निवेश कर सकते हैं। कोशिश करें कि एक ही कैटेगरी के बहुत सारे फंड्स न रखें। एक संतुलित पोर्टफोलियो के लिए आमतौर पर 4 से 6 अच्छे और अलग-अलग तरह के फंड्स काफी होते हैं।













