सैलरी रिविज़न और एरियर का मतलब
सैलरी रिविज़न का मतलब है आपकी तनख्वाह में बढ़ोतरी। कई बार कंपनियां यह बढ़ोतरी पिछली किसी तारीख (retrospective effect) से लागू करती हैं। इसका मतलब है कि आपको पिछली अवधि का बढ़ा हुआ पैसा एकमुश्त मिलता है,
जिसे 'एरियर' या 'बकाया' कहते हैं। उदाहरण के लिए, अगर अप्रैल में आपकी सैलरी बढ़ी लेकिन यह जनवरी से लागू हुई, तो आपको जून की सैलरी के साथ जनवरी, फरवरी और मार्च का बढ़ा हुआ पैसा भी मिलेगा। यही एरियर है। इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार, एरियर पर टैक्स उसी साल लगता है जिस साल वह आपको मिलता है, न कि उस साल जिस साल का वह होता है।
एरियर से टैक्स का बोझ क्यों बढ़ता है?
जब आपको एकमुश्त एरियर मिलता है, तो उस वित्तीय वर्ष में आपकी कुल आमदनी बढ़ जाती है। इस बढ़ी हुई आमदनी के कारण आप ऊंचे टैक्स स्लैब में आ सकते हैं, जिससे आपको सामान्य से ज़्यादा टैक्स देना पड़ सकता है। मान लीजिए आपकी सालाना आय 9 लाख रुपये है और आपको 2 लाख रुपये का एरियर मिला। अब आपकी कुल आय 11 लाख रुपये हो गई, जिससे आप 30% वाले टैक्स स्लैब में आ सकते हैं। इसी अतिरिक्त टैक्स के बोझ से बचाने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में एक खास प्रावधान है।
सेक्शन 89(1) - आपका टैक्स बचाने वाला दोस्त
इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 89(1) आपको एरियर मिलने के कारण बढ़े हुए टैक्स के बोझ से राहत दिलाता है। यह राहत यह सुनिश्चित करती है कि आपको सिर्फ इसलिए ज़्यादा टैक्स न देना पड़े क्योंकि पिछले सालों का पैसा आपको इस साल मिला है। इस राहत का सिद्धांत सरल है: यह टैक्स की गणना इस तरह से करता है मानो आपको यह पैसा उसी साल मिला हो, जिस साल का यह बकाया था। इससे आप पर अचानक आए टैक्स के बोझ का असर कम हो जाता है।
फॉर्म 10E: राहत पाने की अनिवार्य सीढ़ी
सेक्शन 89(1) के तहत टैक्स राहत का दावा करने के लिए आपको फॉर्म 10E भरना अनिवार्य है। यह फॉर्म आपको अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने से पहले ऑनलाइन भरना होता है। अगर आप ITR में राहत का दावा कर लेते हैं लेकिन फॉर्म 10E नहीं भरते हैं, तो आयकर विभाग आपके दावे को अस्वीकार कर सकता है और आपको नोटिस भी भेज सकता है। यह फॉर्म इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर आसानी से उपलब्ध है।
फॉर्म 10E और ITR भरने की प्रक्रिया
सबसे पहले, अपने नियोक्ता से मिले फॉर्म 16 और एरियर की विस्तृत शीट को ध्यान से देखें। सुनिश्चित करें कि उसमें एरियर की राशि का स्पष्ट उल्लेख हो। 1. फॉर्म 10E भरें: इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करें। 'e-File' मेन्यू में 'Income Tax Forms' पर जाएं और 'Form 10E' चुनें। संबंधित असेसमेंट ईयर (जिस साल एरियर मिला) चुनें। आपको पिछले वर्षों की आय और उस पर लगे टैक्स की जानकारी देनी होगी, जिस साल का एरियर मिला है। 2. ITR फाइल करें: फॉर्म 10E सफलतापूर्वक जमा करने के बाद अपना ITR (आमतौर पर ITR-1 या ITR-2) भरना शुरू करें। अपनी सैलरी की जानकारी भरते समय कुल सैलरी में एरियर की रकम शामिल करें। 3. राहत का दावा करें: ITR फॉर्म में आपको 'Relief under Section 89(1)' का एक कॉलम मिलेगा। यहां आपको वह राशि भरनी है जो फॉर्म 10E में कैलकुलेट होकर आई है। पोर्टल अक्सर यह राशि फॉर्म 10E से अपने आप उठा लेता है, लेकिन इसे जांचना आपकी ज़िम्मेदारी है।
कुछ ज़रूरी बातें जिनका ध्यान रखें
एरियर पर टैक्स की गणना थोड़ी जटिल हो सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पिछले वर्षों में आप किस टैक्स स्लैब में थे और अब किसमें हैं। फॉर्म 10E भरते समय आपको हर उस साल की कुल आय और टैक्स की जानकारी देनी होगी, जिससे एरियर संबंधित है। इसलिए, अपने पुराने टैक्स रिकॉर्ड और फॉर्म 16 को संभाल कर रखना एक अच्छी आदत है। यदि आपको प्रक्रिया जटिल लगे, तो किसी टैक्स सलाहकार की मदद लेने में संकोच न करें। थोड़ी सी सावधानी आपको भविष्य में आने वाले किसी भी टैक्स नोटिस से बचा सकती है और आपके टैक्स की बचत भी कर सकती है।















