पीएफ की रकम में क्या-क्या शामिल होता है?
आपकी पीएफ की कुल जमा राशि मुख्य रूप से तीन हिस्सों से मिलकर बनती है। पहला, आपका यानी कर्मचारी का योगदान, जो आपकी बेसिक सैलरी का 12% होता है। दूसरा, आपकी कंपनी यानी नियोक्ता का योगदान, जो भी 12% होता है। हालांकि,
नियोक्ता के 12% योगदान में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है और बचा हुआ 3.67% ही आपके पीएफ खाते में जमा होता है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इन दोनों ही योगदानों पर हर साल मिलने वाला ब्याज है। इन तीनों को मिलाकर ही आपकी अंतिम रकम बनती है।
ब्याज की गणना कैसे होती है?
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) हर वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दर की घोषणा करता है। हाल ही में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ब्याज दर 8.25% घोषित की गई है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पीएफ पर ब्याज की गणना मासिक क्लोजिंग बैलेंस के आधार पर की जाती है, लेकिन इसे आपके खाते में वित्तीय वर्ष के अंत में यानी 31 मार्च को ही जमा किया जाता है। आपकी पासबुक में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के हिस्से पर मिला कुल ब्याज स्पष्ट रूप से दिखाया जाता है, जिससे आपको अपनी कुल कमाई का पता चलता है।
निकासी पर टैक्स के नियम: कब और कितना?
पीएफ की रकम पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह आपकी नौकरी की कुल अवधि पर निर्भर करता है। यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे समझना जरूरी है।
- 5 साल से ज्यादा की नौकरी: अगर आपने अलग-अलग नियोक्ताओं के साथ मिलाकर भी लगातार 5 साल की नौकरी पूरी कर ली है, तो पीएफ निकालने पर कोई टैक्स नहीं लगता। आप अपनी पूरी रकम टैक्स-फ्री निकाल सकते हैं।
- 5 साल से कम की नौकरी: अगर आपकी नौकरी की कुल अवधि 5 साल से कम है और आप 50,000 रुपये से ज्यादा की रकम निकालते हैं, तो इस पर TDS (स्रोत पर कर कटौती) लागू होता है। अगर आपने अपना पैन कार्ड EPFO में जमा किया है, तो 10% TDS कटेगा। पैन कार्ड न होने की स्थिति में यह कटौती 30% तक हो सकती है। हालांकि, अगर आपकी कुल आय टैक्सेबल सीमा से कम है, तो आप फॉर्म 15G/15H जमा करके TDS से बच सकते हैं।
पेंशन (EPS) की रकम का क्या होता है?
अगर आपकी नौकरी 10 साल से कम है, तो आप पीएफ की रकम के साथ पेंशन का पैसा भी निकाल सकते हैं। इसके लिए आपको फॉर्म 10C भरना होता है। हालांकि, नए नियमों के अनुसार, 10 साल से पहले नौकरी छोड़ने पर पेंशन की एकमुश्त राशि निकालने के लिए अब 36 महीने (3 साल) का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, अगर आपकी नौकरी 10 साल से ज्यादा हो गई है, तो आप पेंशन की रकम नहीं निकाल सकते। इसके बजाय, आपको 58 साल की उम्र के बाद मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। इसके लिए आपको एक स्कीम सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।
अंतिम गणना: एक उदाहरण से समझें
मान लीजिए, आपने 4 साल नौकरी की और अब आप अपना पीएफ निकालना चाहते हैं। अपनी अंतिम रकम जानने के लिए EPFO पोर्टल से अपनी पासबुक डाउनलोड करें।
1. कर्मचारी का कुल योगदान: पासबुक में देखें कि इन 4 सालों में आपकी तरफ से कुल कितना पैसा जमा हुआ है।
2. नियोक्ता का कुल योगदान: पासबुक में नियोक्ता द्वारा जमा की गई कुल राशि देखें (3.67% वाला हिस्सा)।
3. कुल ब्याज: पासबुक में अब तक जमा हुआ कुल ब्याज देखें।
आपकी एकमुश्त निकासी की रकम = (कर्मचारी का कुल योगदान) + (नियोक्ता का कुल योगदान) + (कुल ब्याज)।
चूंकि नौकरी 5 साल से कम है, इसलिए इस कुल रकम पर 10% TDS कटेगा (यदि रकम 50,000 से ज्यादा है)। बची हुई राशि आपके बैंक खाते में जमा होगी। इसके साथ ही, आप पेंशन की रकम (EPS) भी फॉर्म 10C भरकर अलग से निकाल सकते हैं।
नए नियम और निकासी की शर्तें
सरकार ने हाल ही में EPF स्कीम 2026 लागू की है। इसके तहत, बेरोजगारी की स्थिति में अब आप एक महीने बाद 75% और दो महीने बाद बाकी 25% रकम निकाल सकते हैं। नए नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों को कुछ बचत बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा, नौकरी बदलने की स्थिति में पीएफ की रकम निकालने की बजाय उसे नई कंपनी के खाते में ट्रांसफर करना हमेशा एक बेहतर विकल्प माना जाता है, ताकि 5 साल की निरंतरता बनी रहे और आपको टैक्स का नुकसान न हो।














