स्पेन का दबदबा और अर्जेंटीना का संघर्ष
मैच की शुरुआत से ही स्पेन ने गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और अर्जेंटीना को दबाव में डाल दिया। स्पेन की युवा और ऊर्जा से भरी मिडफील्ड ने अर्जेंटीना के खेल को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया, जिससे मेसी
और उनके साथी खिलाड़ी खुलकर नहीं खेल पाए। पूरे 90 मिनट के खेल में अर्जेंटीना स्पेन के गोल पर एक भी शॉट टारगेट पर नहीं रख सका, जो उनके आक्रमण की विफलता को दर्शाता है। स्पेन ने लगातार हमले किए, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने कई शानदार बचाव करते हुए मैच को अतिरिक्त समय तक जीवित रखा।
मिडफील्ड की लड़ाई: जहां हारा अर्जेंटीना
किसी भी बड़े फुटबॉल मैच की तरह, इस फाइनल का फैसला भी मिडफील्ड की लड़ाई में हुआ। स्पेन के खिलाड़ियों रोड्री और एलेक्स बेना ने मिलकर अर्जेंटीना के मिडफील्ड को पूरी तरह से बेअसर कर दिया। उन्होंने न केवल गेंद को अपने कब्जे में रखा, बल्कि अर्जेंटीना को उनके पसंदीदा लॉन्ग पास वाले खेल को खेलने का मौका ही नहीं दिया। मेसी पर अत्यधिक निर्भरता एक बार फिर अर्जेंटीना के लिए महंगी साबित हुई। स्पेनिश डिफेंडरों ने मेसी को पूरी तरह से घेर कर रखा, जिससे वह कोई बड़ा जादू नहीं कर सके और टीम के दूसरे खिलाड़ी भी मौके बनाने में नाकाम रहे।
एंजो फर्नांडीज का रेड कार्ड: असली टर्निंग पॉइंट
मैच का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ अतिरिक्त समय से ठीक पहले आया। 90 मिनट के खेल के बाद इंजरी टाइम में, अर्जेंटीना के प्रमुख मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज को पाउ कुबारसी पर फाउल करने के लिए दूसरा पीला कार्ड दिखाया गया, जो रेड कार्ड में बदल गया। इसके बाद अर्जेंटीना को 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा, जिससे उनकी मुश्किलें और भी बढ़ गईं। इस एक पल ने स्पेन को मनोवैज्ञानिक और सामरिक रूप से बड़ी बढ़त दे दी। 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने के दबाव में अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति बिखर गई, जिसका फायदा स्पेन ने उठाया।
फेरान टोरेस का निर्णायक गोल
अतिरिक्त समय में स्पेन का दबाव और बढ़ गया। मैच के 106वें मिनट में, सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी के तौर पर मैदान में उतरे फेरान टोरेस ने निको विलियम्स के एक पास पर शानदार गोल दागकर स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी, जो अंत तक कायम रही। यह गोल अर्जेंटीना के ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ। 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही अर्जेंटीना की टीम के पास वापसी करने का कोई मौका नहीं बचा था। इस गोल के साथ ही स्पेन 16 साल के लंबे इंतजार के बाद अपना दूसरा विश्व कप खिताब जीतने में सफल रहा।
कोचिंग और रणनीति में कहां हुई चूक?
अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी के कुछ फैसलों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पहले हाफ में डिफेंडर लिसांड्रो मार्टिनेज का चोटिल होकर बाहर होना टीम के लिए एक बड़ा झटका था। इसके अलावा, जब टीम दबाव में थी, तो कुछ सब्स्टिटूशन उतने प्रभावी साबित नहीं हुए, जितने की उम्मीद थी। दूसरी ओर, स्पेन के कोच लुइस डे ला फुएंते की रणनीति सफल रही। उन्होंने फेरान टोरेस जैसे खिलाड़ी को सही समय पर मैदान में उतारा, जिन्होंने मैच का रुख ही पलट दिया। स्पेन की टीम ने एक यूनिट के रूप में बेहतर प्रदर्शन किया और यही उनकी जीत का सबसे बड़ा कारण बना।










