बचत खाते और एफडी का ब्याज
यह सबसे आम चूक है। बहुत से लोग यह मानते हैं कि उनके बचत खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर मिलने वाला ब्याज बहुत कम है, इसलिए इसे बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन यह सच नहीं है। आयकर नियमों के अनुसार, आपको
अपनी सभी ब्याज आय की जानकारी देनी होगी। बचत खाते से मिले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर धारा 80TTA के तहत छूट मिलती है, लेकिन इसे पहले 'अन्य स्रोतों से आय' में दिखाना जरूरी है। एफडी पर मिला ब्याज पूरी तरह से कर योग्य होता है। बैंक आपका टीडीएस काट भी लें, तब भी आपको इसे अपनी कुल आय में शामिल करना होता है।
किराये से होने वाली आमदनी
अगर आपके पास कोई दूसरी प्रॉपर्टी है जिसे आपने किराए पर दिया है, तो उससे होने वाली आय 'हाउस प्रॉपर्टी से आय' के तहत कर योग्य है। कई लोग यह आय सिर्फ इसलिए नहीं दिखाते क्योंकि किराया नकद में मिलता है या उन्हें नियमों की जानकारी नहीं होती। आपको किराये की कुल रकम में से नगर निगम टैक्स घटाने के बाद 30% का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। इसके बाद बची हुई रकम आपकी कुल आय में जुड़ जाती है। इस आय को छिपाने पर आयकर विभाग आसानी से पता लगा सकता है, क्योंकि अब कई वित्तीय लेनदेन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
कैपिटल गेन्स यानी पूंजीगत लाभ
शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, सोना या प्रॉपर्टी बेचने से होने वाले मुनाफे को कैपिटल गेन कहते हैं और इसे आईटीआर में दिखाना अनिवार्य है। आजकल कई युवा स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं, लेकिन अक्सर वे इससे हुए छोटे-मोटे मुनाफे को दिखाना भूल जाते हैं। आपको यह ध्यान रखना होगा कि एक साल से कम समय में बेचे गए शेयरों पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) और एक साल से ज्यादा समय के बाद बेचे गए शेयरों पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) लगता है, जिनकी टैक्स दरें अलग-अलग होती हैं। आपके ब्रोकर द्वारा दिए गए कैपिटल गेन स्टेटमेंट की मदद से इसे आसानी से भरा जा सकता है।
फ्रीलांस या साइड बिजनेस से कमाई
आज की गिग इकॉनमी में बहुत से नौकरीपेशा लोग अतिरिक्त आय के लिए वीकेंड पर या खाली समय में फ्रीलांस काम करते हैं। यह कंसल्टिंग, कंटेंट राइटिंग, डिजाइनिंग या किसी भी तरह का छोटा बिजनेस हो सकता है। इस तरह से होने वाली आय को 'बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय' या 'अन्य स्रोतों से आय' के तहत दिखाना जरूरी है। लोग अक्सर यह सोचते हैं कि यह छोटी-मोटी कमाई है और इसे दिखाने की जरूरत नहीं है, जो कि एक बड़ी गलती है।
आय छिपाने के गंभीर परिणाम क्या हैं?
आयकर विभाग अब पहले से कहीं ज्यादा तकनीक-सक्षम है। आपका एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS आपके लगभग सभी वित्तीय लेन-देन को ट्रैक करता है। अगर आपके द्वारा फाइल किए गए आईटीआर और AIS में दर्ज जानकारी में कोई अंतर पाया जाता है, तो विभाग आपको नोटिस भेज सकता है। आय को जानबूझकर छिपाने या गलत जानकारी देने पर आयकर अधिनियम की धारा 270A के तहत भारी जुर्माना लग सकता है। यह जुर्माना आपकी टैक्स देनदारी का 50% से लेकर 200% तक हो सकता है। कुछ गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।














