नंबर 5: जूड बेलिंगहैम (इंग्लैंड)
इंग्लैंड के दिल की धड़कन, जूड बेलिंगहैम ने एक ऑल-एक्शन मिडफील्डर के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को और भी मजबूत किया। उन्होंने इस विश्व कप में सब कुछ किया - टैकल जीते, हमले बनाए, और बॉक्स-टू-बॉक्स दौड़ लगाई।
उनकी ऊर्जा और दृढ़ संकल्प पूरे इंग्लैंड की टीम के लिए प्रेरणादायक थे। सेमीफाइनल में मिली करीबी हार के बावजूद, बेलिंगहैम का प्रदर्शन असाधारण था। उन्होंने पिच के हर कोने को कवर किया और दिखाया कि एक आधुनिक मिडफील्डर कैसा होना चाहिए। उन्होंने टूर्नामेंट में सात गोल के साथ कांस्य बूट भी जीता, जो एक मिडफील्डर के लिए एक अविश्वसनीय उपलब्धि है। उनका नेतृत्व और खेल के प्रति जुनून उन्हें इस सूची में पांचवें स्थान पर रखता है।
नंबर 4: माइकल ओलिसे (फ्रांस)
फ्रांस भले ही चौथे स्थान पर रहा, लेकिन उनके खिलाड़ी माइकल ओलिसे ने अपनी रचनात्मकता से सभी का दिल जीत लिया। ओलिसे टूर्नामेंट के क्रिएटिविटी किंग के रूप में उभरे। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में सर्वाधिक सात असिस्ट प्रदान किए। चाहे वह एम्बाप्पे के पीछे खेलना हो या विंग से आक्रमण करना हो, ओलिसे अपनी टीम के लिए मौके बनाने में माहिर थे। उनकी दूरदृष्टि और सटीक पास ने फ्रांस के आक्रमण को एक नया आयाम दिया। कई मौकों पर उन्होंने अपनी ड्रिबलिंग क्षमता से डिफेंडरों को पछाड़ दिया। उनका प्रदर्शन इस बात का सबूत था कि फुटबॉल सिर्फ गोल करने के बारे में नहीं है, बल्कि गोल बनाने की कला भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
नंबर 3: लियोनेल मेस्सी (अर्जेंटीना)
39 साल की उम्र में, लियोनेल मेस्सी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्लास स्थायी होती है। अर्जेंटीना को फाइनल तक ले जाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। उन्होंने आठ गोल और चार असिस्ट के साथ सिल्वर बूट जीता। हर मैच में, मेस्सी ने अपनी जादुई ड्रिबलिंग, अविश्वसनीय पासिंग और खेल को पढ़ने की क्षमता का प्रदर्शन किया। भले ही फाइनल में उन्हें स्पेन से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन शानदार था। उन्होंने दिखाया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और वह अभी भी खेल के शिखर पर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्हें सिल्वर बॉल से सम्मानित किया गया, जो टूर्नामेंट के दूसरे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को दिया जाता है।
नंबर 2: किलियन एम्बाप्पे (फ्रांस)
फ्रांस के सुपरस्टार किलियन एम्बाप्पे के लिए यह एक और शानदार विश्व कप था। उन्होंने 10 गोल दागकर लगातार दूसरी बार गोल्डन बूट अपने नाम किया। उनकी गति, शक्ति और फिनिशिंग का किसी भी डिफेंस के पास कोई जवाब नहीं था। एम्बाप्पे ने फ्रांस के आक्रमण का नेतृत्व किया और कई मौकों पर अकेले ही मैच का रुख बदल दिया। हालांकि उनकी टीम खिताब जीतने से चूक गई, लेकिन एम्बाप्पे का व्यक्तिगत प्रदर्शन अविश्वसनीय था। उन्हें टूर्नामेंट के तीसरे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में कांस्य बॉल से सम्मानित किया गया। उनकी निरंतरता और बड़े मंच पर प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें इस पीढ़ी के महानतम खिलाड़ियों में से एक बनाती है।
नंबर 1: रोड्रि (स्पेन)
और अब, नंबर एक स्थान पर हैं स्पेन के कप्तान और मिडफील्ड के महारथी, रोड्रि। स्पेन को उनका दूसरा विश्व कप खिताब दिलाने में रोड्रि की भूमिका सर्वोपरि थी। उन्हें टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में गोल्डन बॉल से सम्मानित किया गया। रोड्रि ने पूरे टूर्नामेंट में स्पेन के लिए एक स्थिर उपस्थिति बनाए रखी, रक्षा और आक्रमण को एक साथ जोड़ा। उनकी सटीक पासिंग, सामयिक हस्तक्षेप और खेल पर नियंत्रण अभूतपूर्व था। फाइनल में अर्जेंटीना के खिलाफ, उन्होंने 105 में से 101 पास पूरे किए और 80 प्रतिशत ड्यूल्स जीते। वह सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि पिच पर एक जनरल थे, जिन्होंने अपनी टीम को जीत की ओर अग्रसर किया। उनका शानदार प्रदर्शन उन्हें इस विश्व कप का निर्विवाद रूप से सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनाता है।











