कानून की ज़रूरत क्यों पड़ी?
मनोरंजन की दुनिया जितनी ग्लैमरस दिखती है, उतनी ही απαιτητική (demanding) भी है। बच्चों के लिए लंबे समय तक काम करना, मुश्किल सीन करना और अपनी पढ़ाई से दूर रहना उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर
डाल सकता है। इसी शोषण और उपेक्षा से बचाने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने 'मनोरंजन उद्योग में बच्चों की भागीदारी के लिए दिशानिर्देश' जारी किए हैं। इन नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे का काम उसके बचपन, शिक्षा और स्वास्थ्य की कीमत पर न हो।
काम के घंटे और आराम का नियम
सबसे महत्वपूर्ण नियमों में से एक काम के घंटे तय करना है। कोई भी बाल कलाकार एक दिन में पांच या छह घंटे से ज़्यादा काम नहीं कर सकता और उन्हें हर तीन घंटे के बाद ब्रेक देना अनिवार्य है। इसके अलावा, बच्चों से रात के समय (शाम 7 बजे से सुबह 8 बजे के बीच) और लगातार 27 दिनों से ज़्यादा काम नहीं कराया जा सकता। यह नियम सुनिश्चित करता है कि बच्चों को पर्याप्त आराम मिले और उन पर काम का अतिरिक्त बोझ न पड़े। 3 महीने से कम उम्र के शिशुओं को सिर्फ टीकाकरण या दूध उत्पादन के विज्ञापनों में ही लिया जा सकता है।
पढ़ाई और सुरक्षित माहौल की गारंटी
नियम यह भी कहते हैं कि शूटिंग की वजह से बच्चे की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। अगर शूटिंग के दौरान स्कूल छूटता है, तो निर्माता की ज़िम्मेदारी है कि वह बच्चे के लिए ट्यूटर या उचित शिक्षा की व्यवस्था करे। सेट पर बच्चों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ माहौल बनाना भी ज़रूरी है। इसमें साफ-सुथरे रेस्ट रूम, पौष्टिक भोजन और पानी की व्यवस्था शामिल है। छह साल से कम उम्र के बच्चे के साथ हर समय माता-पिता में से किसी एक या कानूनी अभिभावक का सेट पर रहना अनिवार्य है। बच्चों को वयस्क कलाकारों, खासकर विपरीत लिंग के कलाकारों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने की अनुमति नहीं है।
भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान
बच्चों को किसी भी ऐसे सीन में शामिल नहीं किया जा सकता जो उन्हें मानसिक रूप से परेशान करे, शर्मिंदा करे या डराए। रियलिटी शो में जजों द्वारा बच्चों के साथ कठोर व्यवहार या उनका उपहास उड़ाने पर भी सख्त मनाही है। दिशानिर्देश यह भी कहते हैं कि किसी भी बच्चे को शराब, धूम्रपान या किसी भी तरह की असामाजिक गतिविधि में लिप्त नहीं दिखाया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य बच्चों को भावनात्मक शोषण से बचाना और उनके आत्म-सम्मान को बनाए रखना है।
कमाई का प्रबंधन और कानूनी प्रक्रिया
बाल कलाकार की मेहनत की कमाई का दुरुपयोग न हो, इसके लिए भी खास प्रावधान है। नियमों के अनुसार, बच्चे की कुल कमाई का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा उसके नाम पर एक राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा करना अनिवार्य है, जिसे वह 18 साल का होने के बाद ही निकाल सकता है। इसके अलावा, किसी भी बच्चे को काम पर रखने से पहले, निर्माता को संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट (DM) से अनुमति लेनी होती है और बच्चे को पंजीकृत कराना होता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि सरकार के पास यह रिकॉर्ड हो कि कौन सा बच्चा कहाँ और किन परिस्थितियों में काम कर रहा है।














