सबसे पहले, यह गट हेल्थ आखिर है क्या?
गट हेल्थ या आंतों का स्वास्थ्य, आपके पाचन तंत्र में मौजूद करोड़ों बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों के संतुलन को दर्शाता है। इसे 'गट माइक्रोबायोम' भी कहते हैं। यह माइक्रोबायोम सिर्फ खाना पचाने में ही मदद
नहीं करता, बल्कि आपकी इम्यूनिटी, मूड और मानसिक स्वास्थ्य को भी नियंत्रित करता है। जब आंत में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या संतुलित रहती है, तो आपकी गट हेल्थ अच्छी मानी जाती है। विशेषज्ञ तो यहां तक कहते हैं कि हमारी आंतें हमारे शरीर का 'दूसरा दिमाग' हैं। इसलिए, इसका स्वस्थ रहना पूरे शरीर के लिए ज़रूरी है।
बाहर के खाने में क्या है असली समस्या?
जब हम बाहर खाते हैं, तो स्वाद के चक्कर में अक्सर सेहत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। रेस्टोरेंट के खाने में कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो गट हेल्थ के लिए अच्छी नहीं होतीं। इनमें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड सामग्री, अत्यधिक चीनी, नमक और अनहेल्दी फैट शामिल हैं। कई पैकेटबंद और तैयार भोजन में इमल्सीफायर, प्रिजर्वेटिव और आर्टिफिशियल फ्लेवर जैसे एडिटिव्स होते हैं, जो आंतों की परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं और सूजन बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, बाहर के खाने में फाइबर की मात्रा अक्सर कम होती है, जो अच्छे गट बैक्टीरिया का मुख्य भोजन है। इन सब कारणों से आंतों में खराब बैक्टीरिया की संख्या बढ़ सकती है और अच्छे बैक्टीरिया कम हो सकते हैं।
खराब गट हेल्थ के लक्षण क्या हैं?
अगर आपकी गट हेल्थ खराब हो रही है, तो शरीर कुछ संकेत देने लगता है। बार-बार गैस, पेट फूलना, कब्ज, एसिडिटी या दस्त होना इसके आम लक्षण हैं। इसके अलावा, हर समय थकान महसूस होना, त्वचा पर मुंहासे या रैशेज होना, अचानक वजन बढ़ना या घटना और बार-बार मूड बदलना भी खराब गट हेल्थ की ओर इशारा कर सकता है। चूंकि हमारी 70-80% इम्यूनिटी गट में रहती है, इसलिए बार-बार बीमार पड़ना भी एक संकेत हो सकता है।
तो क्या बाहर खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?
इसका जवाब है, नहीं। सामाजिक जीवन और व्यस्त जीवनशैली में बाहर खाना पूरी तरह से बंद करना शायद संभव न हो। अच्छी खबर यह है कि आपको ऐसा करने की ज़रूरत भी नहीं है। ज़रूरी यह है कि आप स्मार्ट विकल्प चुनें और कुछ सावधानियां बरतें। संतुलन और सही जानकारी के साथ आप बाहर खाने का आनंद भी ले सकते हैं और अपनी गट हेल्थ का ध्यान भी रख सकते हैं।
बाहर खाते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगली बार जब आप बाहर खाएं, तो कुछ स्मार्ट टिप्स अपनाएं। तले हुए या क्रीमी सॉस वाले व्यंजनों की बजाय ग्रिल्ड, बेक्ड या स्टीम्ड चीजें चुनें। खाने में सलाद या भुनी हुई सब्जियों को शामिल करें ताकि आपको फाइबर मिल सके। प्रोसेस्ड फूड्स और मीठे ड्रिंक्स से बचें। दही, छाछ या लस्सी जैसे प्रोबायोटिक ड्रिंक्स एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। खाना हमेशा धीरे-धीरे और चबाकर खाएं, इससे पाचन बेहतर होता है। इसके अलावा, ऐसे रेस्टोरेंट चुनें जहां ताज़ी सामग्री का इस्तेमाल होता हो और साफ़-सफाई का ध्यान रखा जाता हो।














