New vs Old Tax Regime: अगर आप इस साल अपनी पुरानी प्रॉपर्टी (मकान, जमीन या फ्लैट) बेचने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो सिर्फ टैक्स रेट देखकर फैसला न करें। कई मामलों में पुराना नियम यानी 20% टैक्स के साथ इंडेक्सेशन लाभ आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है,
जबकि कुछ मामलों में 12.5% बिना इंडेक्सेशन वाला विकल्प बेहतर साबित हो सकता है। खासकर जिन लोगों ने प्रॉपर्टी 22 जुलाई 2024 या उससे पहले खरीदी है, उन्हें दोनों ऑप्शन की तुलना जरूर करनी चाहिए।
इंडेक्सेशन क्या होता है?
इंडेक्सेशन एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें महंगाई (Inflation) को ध्यान में रखते हुए प्रॉपर्टी की खरीद कीमत को बढ़ाकर माना जाता है। इसका फायदा यह होता है कि टैक्स लगाने वाला लाभ (Taxable Capital Gain) कम हो जाता है। कम लाभ पर टैक्स लगता है। लंबे समय से रखी गई प्रॉपर्टी में टैक्स बचत ज्यादा हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर आपने 2010 में कोई प्रॉपर्टी ₹50 लाख में खरीदी थी, तो इंडेक्सेशन के बाद 2026 में उसकी लागत ₹90 लाख मानी जा सकती है।
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उदाहरण से समझें टैक्स कैलकुलेशन
मान लेते हैं:
प्रॉपर्टी पर्चेज डेट : 2010
खरीद कीमत: ₹50 लाख
बिक्री वर्ष: 2026
बिक्री कीमत: ₹1.50 करोड़
इंडेक्सेशन के बाद कीमत: ₹90 लाख
अब दोनों नियमों के तहत टैक्स देखते हैं...
ऑप्शन 1: पुराना नियम
- 20% टैक्स + इंडेक्सेशन
- बिक्री कीमत: ₹1,50,00,000
- (-) इंडेक्सेशन के बाद लागत: ₹90,00,000
- टैक्स योग्य लाभ = ₹60,00,000
टैक्स:
₹60 लाख × 20% = ₹12,00,000
ऑप्शन 2: नया नियम
- 12.5% टैक्स + बिना इंडेक्सेशन
- बिक्री कीमत: ₹1,50,00,000
- (-) खरीद कीमत: ₹50,00,000
- टैक्सेबल प्रॉफिट: ₹1,00,00,000
टैक्स:
₹1 करोड़ × 12.5% = ₹12,50,000
इस उदाहरण में कौन सा विकल्प बेहतर रहा?
20% टैक्स + इंडेक्सेशन में टैक्स: ₹12 लाख
12.5% टैक्स बिना इंडेक्सेशन में टैक्स: ₹12.50 लाख
यानी इंडेक्सेशन वाले ऑप्शन में ₹50,000 की टैक्स बचत हुई। इससे साफ है कि कम टैक्स रेट होने के बावजूद नया नियम हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद नहीं हो सकता।
ओल्ड टैक्स रिजीम सही या न्यू टैक्स रिजीम?
अगर प्रॉपर्टी की खरीद हाल में हुई है और कीमत बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है, तो 12.5% वाला विकल्प फायदेमंद हो सकता है। वहीं, पुरानी प्रॉपर्टी जिसमें खरीद कीमत बहुत कम थी और कई वर्षों में कीमत काफी बढ़ गई है, उसमें इंडेक्सेशन टैक्स बचाने में मदद कर सकता है।
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प्रॉपर्टी बेचने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
1. होल्डिंग पीरियड देखें
24 महीने से ज्यादा समय तक रखी गई प्रॉपर्टी आमतौर पर लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट मानी जाती है।
2. दोनों ऑप्शन की गणना करें
सिर्फ टैक्स रेट देखकर फैसला न लें। इंडेक्सेशन के बाद कितना प्रॉफिट बच रहा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
3. टैक्स छूट का भी ध्यान रखें
कुछ मामलों में धारा 54 (दूसरा घर खरीदने पर) और धारा 54EC (कैपिटल गेन बॉन्ड) के तहत छूट का लाभ मिल सकता है, लेकिन इसके लिए तय शर्तों को पूरा करना जरूरी है।














